पैतृक जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप, दारगांव निवासी कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे
महासमुंद। बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम दारगांव में पुस्तैनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला प्रकाश में आया है। ग्राम निवासी तनवीर अहमद खान ने इस संबंध में जिला कलेक्टर से शिकायत कर त्वरित न्याय की मांग की है।
तनवीर का आरोप है कि उन्होंने पहले इस मामले की शिकायत एसडीएम, बागबाहरा को भी की थी, परंतु वहां पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आज कलेक्टर जनदर्शन में जाकर मामला उठाना पड़ा। शिकायत के अनुसार, 14 अगस्त 2025 को गांव के कुछ लोगों ने मिलकर उनकी पैतृक जमीन पर जबरदस्ती प्रवेश कर बांस-बल्ली की झोपड़ी बनाकर कब्जा कर लिया। उन्होंने नाम लेकर ग्राम सचिव, ग्राम अध्यक्ष और उपाध्यक्ष व लगभग 50–60 लोगों का आरोप लगाया है कि वे इस कब्जे में शामिल हैं।
तनवीर ने अपने परिवार की भूमि का ऐतिहासिक विवरण भी प्रशासन को सौंपा है। उनके परदादा सैय्यद इब्राहीम को अंग्रेज़ सरकार से 1929–30 में करीब 800.12 एकड़ इनाम में दी गई थी। उनके पूर्वजों ने वही भूमि बसाकर “सूबेदार गांव” की स्थापना की। तनवीर के मुताबिक़ उनकी दादी के खाते में एक समय पर 56/3 (7.50 एकड़) के अतिरिक्त दर्ज भूमि थी जो सड़क से जुड़ी हुई थी; उस पर आबादी बसाने हेतु तत्कालीन अधिकारियों से आवेदन किए गए थे। बाद में भूमि के बंदोबस्त और खातों में फेरबदल होते-होते दादी के खाते में कुल लगभग 123 एकड़ दर्ज थी, परंतु बंदोबस्त के समय और राजस्व अभिलेखों में त्रुटि के कारण कुछ रकबे को घटा-बढ़ाकर दर्ज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 1963–64 में कलेक्टर ने संशोधन किया, पर खसरा-रकबा में विसंगति बनी रही कई हिस्सों का रकबा 1.50 एकड़ (या हेक्टेयर के समकक्ष) कर दिया गया।
तनवीर का कहना है कि तब के बंदोबस्त अधिकारियों व तहसील के अभिलेखों में फेरबदल के कारण उनका बहुत सारा रकबा खाते से हटा दिया गया और बाद में गांव के कुछ लोगों ने उसी जमीन पर घर बनाकर बस्ती विकसित कर ली — जिसे आज “दारगांव बस्ती” कहा जाता है। उन्होंने 2017–18 में भी तहसील में अभिलेख सुधार के लिए आवेदन दिया, पर अभी तक उसका निवारण नहीं हुआ।
तनवीर ने बताया कि उनके पास सभी सम्बंधित कागजात एवं प्रमाण मौजूद हैं — बावजूद इसके ग्राम पटवारी, सचिव, अध्यक्ष और उनके समर्थक मिलकर उनकी भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। उन्होने कहा कि कब्जा छुड़ाने की कोशिश करने पर उनके व उनके परिजनों की जान को जोखिम है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा व त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि तत्काल कब्जाधारियों पर कार्रवाई कर कब्जा हटााया जाए,भूमि अभिलेखों का स्वतंत्र एवं त्वरित सत्यापन कराकर वास्तविक रकबे को बहाल किया जाए, अभिलेख सुधार के लंबित आवेदन का निष्पादन किया जाए।


