महासमुंद। बुजुर्गों को संबल देने वाली शासन की वयोवृद्ध पेंशन योजना, महासमुंद जिले के झलप ग्राम पंचायत में मजाक बनकर रह गई है। यहां के लगभग 35 वृद्धजन पिछले 10 माह से पेंशन की राशि से वंचित हैं।
यह वे लोग हैं जिनके पास जीवकोपार्जन का कोई साधन नहीं है। उनका पूरा सहारा यही पेंशन है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और कागजी उलझनों की वजह से यह राशि उनके हाथों तक नहीं पहुंच पा रही।
पेंशनधारियों ने बताया कि उन्हें फरवरी 2025 में अंतिम बार नवंबर और दिसम्बर माह की राशि दी गई थी। उसके बाद से अब तक एक भी पैसा नहीं मिला। तब से वे ग्राम पंचायत सचिव और जनपद पंचायत से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक चक्कर काट रहे हैं।
ग्राम पंचायत सचिव का कहना है कि जनपद से जो राशि आई थी, वही पात्रों को दी गई है। जबकि जनपद पंचायत दावा करता है कि मार्च 2025 तक की राशि सभी पंचायतों को भेज दी गई है।
समाज कल्याण विभाग की ओर से साफ किया गया कि केंद्र सरकार से नॉन-डीबीटी पेंशन मार्च 2025 तक ही जारी हुई थी। इसके बाद शासन ने आदेश दिया कि पेंशनधारी आधार और बैंक खाता लिंक कराकर सचिव को जमा करें। जनपद के माध्यम से यह डेटा दिल्ली भेजकर अपडेट होना था।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि –
मार्च 2025 तक की राशि जब आ चुकी थी तो बुजुर्गों को क्यों नहीं मिली? ग्राम पंचायत सचिव और जनपद पंचायत ने 10 माह तक राशि रोककर क्यों रखी? बुजुर्गों को समय रहते आधार-बैंक लिंक कराने की जानकारी क्यों नहीं दी गई?
पैसों की आस में झलप की बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष रोजाना उम्मीद लगाते हैं कि शायद आज उनका पेंशन आ जाए। लेकिन महीनों से इंतजार अब बेबसी और आंसुओं में बदल चुका है।
प्रशासन की इस बेरुखी से सवाल उठ रहा है कि क्या शासन की संवेदनशील योजनाएं वाकई उन तक पहुंच रही हैं जिनके लिए बनी हैं, या फिर यह भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई है? अब देखना होगा कि झलप के इन 35 वयोवृद्धों को न्याय कब और कैसे मिलता है।


