Saturday, 7 Mar 2026

साय सरकार की उदासीनता से ग्रामीण विकास ठप, जनप्रतिनिधियों का जोरदार प्रदर्शन

महासमुंद। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार की घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण महासमुंद जिले की पंचायतों को 15वें वित्त आयोग की 2025-26 की राशि लंबे समय से नहीं मिली है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। सड़कें टूटी हुईं, नालियां जाम, पेयजल की भारी किल्लत और स्वच्छता व्यवस्था चरमराई हुई है, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने बुधवार को बड़ी रैली निकालकर जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर सीईओ को ज्ञापन सौंपा और राशि तत्काल जारी करने की मांग की।

जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग की यह राशि पंचायतों में सड़क निर्माण, नाली, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए आवश्यक है, लेकिन सरकार की अनदेखी से गांवों का विकास वर्षों पीछे चला गया है। ग्रामीणों को रोजमर्रा की मूलभूत जरूरतों के लिए भी तरसना पड़ रहा है। पंचायतों की कार्यप्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और सरपंच-जनपद सदस्य असहाय महसूस कर रहे हैं। पूर्व में यह राशि समय पर जारी हो जाती थी, लेकिन साय सरकार आने के बाद पंचायतों को जानबूझकर उपेक्षित किया जा रहा है।

ज्ञापन सौंपते समय जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी कि यदि 26 जनवरी 2026 तक लंबित राशि जारी नहीं की गई तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होगी। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भी स्वच्छता, सजावट और कार्यक्रमों के लिए पंचायतों के पास एक पैसा नहीं है – यह सरकार की ग्रामीण विरोधी नीतियों का जीता-जागता सबूत है।

इस प्रदर्शन में बागबाहरा जनपद पंचायत अध्यक्ष केशव चंद्राकर, जिला पंचायत पूर्व सदस्य अमर चंद्राकर जनपद सदस्य सुधा चंद्राकर, पूर्णिमा सोनवानी सहित विभिन्न जनपद और जिला पंचायतों के सैकड़ों प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में साय सरकार की निंदा की और तत्काल राशि जारी करने की मांग उठाई।

जनप्रतिनिधियों के इस आंदोलन से जिला प्रशासन में खलबली मच गई है, जबकि राज्य सरकार की ग्रामीण विकास को लेकर भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की नाराजगी फैल रही है और यदि राशि नहीं जारी हुई तो बड़ा आंदोलन तय है। सवाल यह है कि साय सरकार ग्रामीण छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कब तक करती रहेगी?

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