महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले को ओडिशा से होने वाली गांजा तस्करी का प्रमुख मार्ग माना जाता है। जिले की पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) लगातार नजर रखे हुए है तथा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रही है। लेकिन हाल के दिनों में उठे कुछ सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
गौरतलब है कि महासमुंद के नए पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हुए हैं। उनके आने के बाद जिला पुलिस में सक्रियता बढ़ी दिख रही है। पिछले कुछ महीनों में ANTF और जिला पुलिस ने ‘ऑपरेशन निश्चय’ के तहत कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं। फरवरी 2026 में ही 24 घंटे के भीतर 132.5 किलो गांजा जब्त कर 11 तस्कर गिरफ्तार किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 66 लाख रुपये बताई गई। इसी तरह जनवरी-फरवरी में कई अन्य मामलों में सैकड़ों किलो गांजा बरामद हुआ और अंतरराज्यीय तस्करों का नेटवर्क टूटा। एसपी प्रभात कुमार ने खुद इन कार्रवाइयों का खुलासा करते हुए नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि नए कप्तान के आने से पहले पिछले डेढ़-दो साल में ऐसी धड़ाधड़ कार्रवाई कम ही देखने को मिली थी। टीम वही पुरानी है, लेकिन नेतृत्व बदलने से पुलिस का रवैया बदला नजर आ रहा है।
हालांकि, एक बड़ा विवादास्पद मामला सामने आया है। विगत दिनों कबीरधाम (कवर्धा) जिले की पुलिस ने रायपुर-जबलपुर NH पर चिल्फी क्षेत्र में एक नागालैंड पासिंग कंटेनर से 9 क्विंटल (900 किलो) गांजा बरामद किया। यह खेप ओडिशा से राजस्थान जा रही थी और कंटेनर में गुप्त चैंबर बनाकर छिपाई गई थी। जब्त गांजे की बाजार कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है तथा कंटेनर भी जब्त कर लिया गया। ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कंटेनर महासमुंद जिले से होकर गुजरा था। सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी खेप महासमुंद पुलिस और ANTF की नजरों से कैसे बच निकली? क्या इसे जानबूझकर जाने दिया गया या निगरानी में चूक हुई? यह खेप महासमुंद में पकड़ी जाती तो जिले की पुलिस को बड़ी सफलता मिलती।
गौरतलब है कि लगभग 8-9 महीने पहले भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब कवर्धा पुलिस ने एक नशा तस्कर को पकड़ा था और जांच में महासमुंद जिले के कुछ पुलिसकर्मियों पर लेन-देन के आरोप लगे थे। उस समय तत्कालीन एसपी ने कुछ सिपाहियों पर कार्रवाई की थी।
अब स्थानीय लोग और पर्यवेक्षक सवाल उठा रहे हैं, क्या नए एसपी को प्रभावित करने और उनकी नजर में ‘अच्छा’ दिखने के लिए शुरुआती कार्रवाइयां की गईं, ताकि पुरानी व्यवस्था बनी रहे? या फिर वाकई नशे के खिलाफ अभियान मजबूत हुआ है? क्या महासमुंद पुलिस अब पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है या फिर कुछ खेपें ‘सुरक्षित’ निकल रही हैं?
पुलिस प्रशासन से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिले में नशा तस्करी पर लगाम लगाने की चुनौती बनी हुई है। एसपी प्रभात कुमार के नेतृत्व में जारी कार्रवाइयों से उम्मीद है कि तस्करों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त होगा।


