Saturday, 8 Aug 2026

ब्रेकिंग न्यूज_पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल “जिस्मफरोशी के खिलाफ आवाज उठाने वाला ही सलाखों के पीछे

महासमुंद। आज सुबह 5.30 बजे तड़के नगर पंचायत अध्यक्ष बलरामकांत साहू को पुलिस ने उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों और समर्थकों ने थाने का घेराव कर दिया, बाजार की सभी दुकानें बंद करा दी गईं और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। भीड़ ने “बलरामकांत साहू को रिहा करो” के नारे लगाए।

गौरतलब है कि बलरामकांत साहू ने महज़ एक दिन पहले ही पुलिस को ज्ञापन सौंपकर नगर क्षेत्र में फल-फूल रहे जिस्मफरोशी के कारोबार पर रोक लगाने की मांग की थी और आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। परंतु हैरत की बात यह है कि अगले ही दिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हीं को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का कहना है कि बीती रात कुछ महिलाओं ने थाने पहुंचकर बलरामकांत साहू पर छेड़छाड़ और पेट्रोल डालकर घर जला देने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने साहू को गिरफ्तार कर लिया।

जिस व्यक्ति ने जिस्मफरोशी जैसे काले धंधे को बंद कराने की आवाज उठाई, क्या संयोग से उसी पर छेड़छाड़ का आरोप लग जाता है? क्या यह महज़ इत्तेफाक है या फिर अवैध धंधों को बचाने की साज़िश? क्या पुलिस की गिरफ्तारी कार्रवाई “पेट्रोल की धमकी” पर हुई, या फिर “जिस्मफरोशी की दुकानें बंद कराने की धमकी” पर?

बलरामकांत साहू की लोकप्रियता – गिरफ्तारी के पीछे राजनीति?

तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष बलरामकांत साहू निर्दलीय नेता हैं। उन्होंने किसी राजनीतिक दल का सहारा लिए बिना, केवल जनता के बल पर रिकॉर्ड बहुमत से चुनाव जीतकर अध्यक्ष पद हासिल किया था। क्या उनकी बढ़ती जनस्वीकृति को देखते हुए उन्हें बदनाम करने और छवि धूमिल करने के लिए यह गिरफ्तारी सुनियोजित तरीके से करवाई गई? क्या यह “कानूनी कार्रवाई” है, या फिर “राजनीतिक साज़िश”?

जब देह व्यापार जैसे मामलों में पीटा एक्ट की कठोर धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं, तब पुलिस ने केवल 151 CrPC में खानापूर्ति कर दी, और जिस व्यक्ति ने इस धंधे को उजागर करने की हिम्मत दिखाई, उसी पर 351(3), 296, 74, 75(2) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा ठोक दिया गया। तो क्या पुलिस अवैध धंधों को खत्म कर रही है, या विरोध करने वालों को?

 

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