महासमुंद। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने एक जटिल और जोखिमपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। 60 वर्षीय मरीज भारतमती सिदार को पेट में भारीपन और बड़ी गांठ की शिकायत पर ओपीडी में दिखाया गया था। जांच में उनके गर्भाशय में लगभग 30 सप्ताह के गर्भाशय के आकार का 3 किलोग्राम का विशाल ग्रीवा फाइब्रॉएड पाया गया।

विशेष चुनौती यह थी कि मरीज पहले से हृदय रोगी थीं। पूर्व-संवेदना जांच में ट्राइकसपिड रेगर्जिटेशन और माइट्रल रेगर्जिटेशन जैसी हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां पाई गईं। इसके बावजूद 19 सितंबर को स्त्री रोग विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) किया।
सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा ठाकुर ने किया। उनकी टीम में डॉ. प्रतिमा कोश्वरा, डॉ. महेंद्र ध्रुवे, डॉ. जूली, ओटी सिस्टर पूजा और तृप्ति शामिल थीं। एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. चंद्रपाल भगत और डॉ. विवेक ने पूरी सर्जरी के दौरान जटिल परिस्थितियों को सफलतापूर्वक संभाला।
विशेषज्ञों ने बताया कि हृदय रोगी में इतनी बड़ी गांठ का ऑपरेशन करना जोखिमपूर्ण था, लेकिन टीमवर्क और बेहतर प्रबंधन की बदौलत मरीज की जान बचाई जा सकी। यह उपलब्धि जिला अस्पताल के लिए न केवल बड़ी चिकित्सकीय सफलता है, बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की किरण भी है।



