महासमुंद। ग्राम कौवाझर में बुजुर्ग महिला और उनके पुत्र के साथ हुए बड़े अन्याय का मामला सामने आया है। स्थानीय सरपंच गेंदराम जांगड़े और कुछ रसूखदार लोगों ने तुगलकी फरमान जारी कर हुक्का पानी बंद कर दिया, साथ ही यह धमकी दी कि अगर किसी ने पीड़ित परिवार का साथ दिया तो 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। पीड़ित परिवार अब न्याय की आस में जिला कलेक्टर के दरबार के चक्कर काटने को मजबूर हो गया है।
निर्मलाबाई चंद्राकर ने शिकायत पत्र में बताया कि उनके पति स्व. चोवालाल चंद्राकर के निधन के बाद वे और उनका पुत्र तोषण कुमार भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों से वार्ड का सार्वजनिक बोरवेल का मोटर सरपंच द्वारा हटा दिया गया है, जिससे उन्हें तालाब के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विकलांग होने के कारण भारी पानी की समस्या से जूझ रही निर्मलाबाई का कहना है कि कई बार सरपंच को सूचित करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़िता ने बताया कि सरपंच और उनके सहयोगियों ने बिना किसी सूचना के गांव में बैठक आयोजित की, जिसमें यह तय किया गया कि उनके घर का हुक्का पानी बंद किया जाएगा। साथ ही मजदूरों पर 10,000 रुपए जुर्माना और सहयोग ना करने वालों पर 50,000 रुपए का दंड लगाने का फरमान जारी किया गया। इस बैठक में गांववासियों को यह प्रेरित भी किया गया कि वे सरकारी जमीन को निजी जमीन पर दर्ज कराने में मदद करें।
निर्मलाबाई ने कहा कि उनका और उनके पुत्र का तालाब के पार जमीन में अधिकार है। हालांकि तालाब के भीतर की जमीन उनके भाई दम्मन लाल के नाम दर्ज है। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह के ग्राम स्वराज कार्यक्रम के अंतर्गत रोड के लिए कुछ हिस्से को गांव को देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन सरपंच और दबंगों ने इसे अपने फायदे के लिए रोका और जोर जबरदस्ती का प्रयास किया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि जो जमीन उनकी पूर्वजों की है, उस जमीन को आम रास्ते के लिए ग्राम के सरपंच और कुछ रसूखदार लोगों ने दबाव बनाते हुए हड़पने की कोशिश की। जब पीड़ित परिवार ने ग्राम पंचायत के कुछ रसूखदार लोगों को जमीन देने से मना कर दिया, तो ग्राम पंचायत ने एक सभा आयोजित की। पीड़ित परिवार इसमें शामिल नहीं हो पाया, जिसके बाद सरपंच और उसके सहयोगियों ने 50,000 रुपए का दंड ठोंकते हुए हुक्का पानी बंद कर दिया। यह मामला स्थानीय प्रशासन और कानून के प्रति उपेक्षा की तस्वीर पेश करता है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कब और किस तरह कार्रवाई करता है।



