महासमुन्द। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया की अध्यक्षता में गठित अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी ने सोमवार को जिला जेल महासमुन्द का अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण दल में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कु. चेतना ठाकुर, सिविल जज प्रियदर्शन गोस्वामी व अदित्य जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पाण्डे, डिप्टी कलेक्टर अक्षत गुप्ता, थाना प्रभारी शरद दुबे, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता तथा सहायक जेल अधीक्षक मुकेश प्रसाद कुशवाहा सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
कमेटी ने सभी बैरकों का भ्रमण किया और बंदियों से एक-एक कर बातचीत की। कैदियों ने भोजन, चिकित्सा, विधिक सहायता और सुरक्षा व्यवस्था पर अपनी राय रखी। कुल मिलाकर जेल की मौजूदा व्यवस्था को कमेटी ने संतोषजनक बताया।
ये प्रमुख निर्णय और सुझाव लिए गए, कैदियों के लिए कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र शुरू किए जाएंगे। सभी अंडरट्रायल कैदियों की पेशी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी, ताकि अनावश्यक देरी और परिवहन जोखिम खत्म हो। जेल के पीछे विभाग को आवंटित जमीन का तत्काल सीमांकन कर विस्तार कार्य शुरू किया जाएगा। आधुनिक वीसी कक्ष, नया मुलाकात कक्ष और NCRB मानकों के अनुसार MCU रूम बनाया जाएगा। सरायपाली में प्रस्तावित ३०० क्षमता वाली उप-जेल के लिए भूमि हस्तांतरण एवं निर्माण प्रस्ताव को प्राथमिकता दी जाएगी।
जिला न्यायाधीश श्रीमती डहरिया ने कहा, “जेल सुधार केवल इमारतें बनाने से नहीं, बल्कि कैदियों के मन में सुधार की भावना जगाने से होगा। आज जो कमियां दिखीं, उन्हें जल्द दूर किया जाएगा।” कलेक्टर श्री लंगेह ने बताया कि उप-जेल सरायपाली का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष है और अगले वित्तीय वर्ष से काम शुरू हो सकता है। इससे जिला जेल में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर हर तिमाही होने वाले इस निरीक्षण से जिले में अंडरट्रायल कैदियों को तेजी से न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।


