कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार की बहुप्रचारित ‘महतारी एक्सप्रेस- 102’ एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दर्री क्षेत्र में गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती सीमा विश्वकर्मा को एम्बुलेंस न मिलने के कारण ई-रिक्शा में ही अस्पताल ले जाना पड़ा और रास्ते में ही चलती ई-रिक्शा में उसने बच्चे को जन्म दे दिया।
पेशे से राजमिस्त्री बाबूलाल विश्वकर्मा ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे उनकी पत्नी सीमा को तेज लेबर पेन हुआ। आनन-फानन में उसे पास के उप-स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहाँ स्टाफ ने जाँच के बाद कहा कि प्रसव में दिक्कत हो सकती है, फौरन जिला मेडिकल कॉलेज लेकर जाएँ। परिजनों ने तुरंत 102 महतारी एक्सप्रेस को कॉल किया। आधे घंटे से ज्यादा इंतजार किया, बार-बार फोन घनघनाते रहे, लेकिन एम्बुलेंस का कोई अता-पता नहीं।
आखिरकार स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने खुद ई-रिक्शा बुलाया और गर्भवती महिला को लिटाकर मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। रास्ते में ही सीमा की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और ई-रिक्शा के भीतर ही बच्चे ने जन्म ले लिया। ई-रिक्शा चालक और परिजन किसी तरह नवजात व माँ को अस्पताल पहुँचाए। डॉक्टरों ने तुरंत दोनों को भर्ती कर इलाज शुरू किया। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि माँ और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं।

परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। बाबूलाल ने कहा,
“सरकार कहती है महतारी एक्सप्रेस हर गाँव-गाँव में पहुँचेगी, लेकिन जब जरूरत पड़ी तो एक फोन का जवाब तक नहीं। अगर कुछ अनहोनी हो जाती तो जिम्मेदार कौन होता? ये गरीब की जान की कीमत क्या है?” जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बी.के. सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। 102 एम्बुलेंस की लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की जाँच की जा रही है। लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मचारी व ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक साल में कोरबा जिले में 102 एम्बुलेंस के देरी से पहुँचने या न पहुँचने की दर्जनों शिकायतें सामने आ चुकी हैं। सवाल यही है, विज्ञापनों में चमकती महतारी एक्सप्रेस धरातल पर कब गरीब की महतारी बनकर समय पर पहुँचेगी? अब देखना यह है कि यह जन्म चलती ई-रिक्शा में हुआ या स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटने में देर होगी!


