Tuesday, 27 Oct 2026

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने काम छोड़ सड़क पर उतरीं, अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

नियमितीकरण, पेंशन और मानदेय वृद्धि समेत पांच सूत्रीय मांगों पर भाजपा सरकार को घेरा

महासमुंद। अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने आज काम बंद कर दिया और एक दिवसीय हड़ताल पर रहीं। संयुक्त मंच के बैनर तले जिलेभर से पहुंची महिला कर्मियों ने सुबह 10 बजे स्थानीय अटल परिसर में डेरा डाला और प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला। हड़ताल के चलते जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटके रहे और बच्चों व गर्भवती-शिशुवती महिलाओं की सेवाएं प्रभावित हुईं।

अटल परिसर में आयोजित धरना सभा में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी मेहनतकश महिला कर्मियों को मूलभूत सुविधाओं और उचित सम्मान से वंचित रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले लाभ उन तक नहीं पहुंच रहे हैं, जबकि उनसे दिन-रात काम लिया जा रहा है। ध्वनि विस्तारक यंत्र के जरिए गूंजते नारों के बीच महिलाओं ने साफ कहा कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगी।

दोपहर बाद करीब 2:30 बजे धरना स्थल से विशाल रैली निकाली गई। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए महिलाएं नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने अपर कलेक्टर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विभागीय सचिव के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसके बाद स्थानीय समस्याओं को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ को भी अलग से ज्ञापन दिया गया।

ज्ञापन में सबसे पहली और प्रमुख मांग सेवाओं के नियमितीकरण की है। कर्मियों का कहना है कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक श्रम कानून के तहत कार्यकर्ता को 30 हजार रुपये और सहायिका को 25,500 रुपये मासिक दिए जाएं। साथ ही कार्यकर्ता को सुपरवाइजर और सहायिका को कार्यकर्ता पद पर सीधे पदोन्नत करने तथा इसके लिए उम्र की बाध्यता खत्म करने की मांग भी रखी गई है।

तीसरी मांग में समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) की सुविधा देने की बात कही गई है। कर्मियों का तर्क है कि वर्षों की सेवा के बाद भी बुढ़ापे की कोई सामाजिक सुरक्षा उनके पास नहीं है। चौथी मांग के तहत सेवाकाल में अकस्मात मृत्यु होने पर परिजनों को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति देने और सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को 5 लाख व सहायिका को 3 लाख रुपये तत्काल देने की मांग की गई है।

पांचवीं मांग में मध्यप्रदेश की तर्ज पर कार्यकर्ता और सहायिकाओं के मानदेय में हर साल 1,000 रुपये की वृद्धि करने की बात कही गई है। महिलाओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई में मौजूदा मानदेय से घर चलाना मुश्किल हो गया है और वे आर्थिक व मानसिक रूप से टूट रही हैं।

पत्रकारों से बातचीत में आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि 10 हजार मानदेय में विभागीय कार्यों के अलावा उनसे लगातार अन्य कई काम कराए जाते हैं, जिसके कारण आंगनबाड़ी का मूल काम बाधित होता है। कर्मियों ने कहा कि गैर-विभागीय कार्यों का बोझ तत्काल कम किया जाए। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने मांगों पर शीघ्र गंभीरता से विचार कर निराकरण नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी।

आज ने इस हड़ताल में छत्तीसगढ़ सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुधा रात्रे , सुलेखा शर्मा, भारती ठाकुर, सुशीला ठाकुर, विभा साहू, अन्नपूर्णा वैष्णव, हाजरा खान, छाया हिरवानी, द्रौपदी साहू, तुसी गोस्वामी, उषा चौहान, शोभा बड़क, बबीता खांडे, बसंती, रामहीन नारंग, जुगेंद्री महापात्र, कृष्ण पटेल, रेणु निराला, दिनेश्वरी, लक्ष्मी, नंदिता, बारीक, सुनीता सोनी, कौशल्या, धनमती, अनुसूइया चंद्राकर, टिनम, रुक्मणि सिदार, तुलसी, अहिल्या मरकाम, अंजू चंद्राकर, रूपा भारती, विमला सोनी, पूर्णिमा ठाकुर, धन्नाति बघेल सहित जिले भर की लगभग 2 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका उपस्थित थी।

Share This Article

- Advertisement -

error: Content is protected !!