Saturday, 7 Mar 2026

अंधे कत्ल का पर्दाफाश, 11 माह बाद हत्यारा सलाखों के पीछे

 पत्नी की हत्या में जेल जा चुका आदतन अपराधी निकला कातिल

महासमुंद। 30 जनवरी 2025 को बहन के घर से निकली सुनीता रजक की रहस्यमयी गुमशुदगी आखिरकार एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में बदल गई थी। लगभग एक माह बाद कोडार क्षेत्र में महिला की जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। यह मामला महीनों तक “अंधा कत्ल” बना रहा, लेकिन अब 11 माह बाद तुमगांव पुलिस ने इस जघन्य हत्या की गुत्थी सुलझा ली है।

इस हत्याकांड का आरोपी सूरज ध्रुव (निवासी–खुटेरी, बागबाहरा) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पहले भी अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल जा चुका आदतन अपराधी है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पाण्डेय के अनुसार, सुनीता रजक (उम्र लगभग 50-55 वर्ष), निवासी धमतरी, पटेवा मड़ई मेला देखने बहन के घर आई थी। 30 जनवरी को पटेवा से लौटते समय रास्ते में उसकी मुलाकात आरोपी सूरज ध्रुव से हुई। आरोपी ने महिला को अपनी बातों में उलझाया, कोडार डेम घुमाने का लालच दिया और काम दिलाने का झांसा देकर उसे अपने साथ ले गया। शाम होते-होते वह उसे कौआझर क्षेत्र की झोपड़ी में ले आया, जहां वह रहता था। कुछ दिनों तक महिला वहीं रही। बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ और सुनीता अपने घर लौटने की जिद करने लगी। इसी बात से भयभीत होकर आरोपी ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रच ली।

घटना की रात वह महिला को कोडार के पास एक सुनसान स्थान पर ले गया, पहले गला दबाकर हत्या की, फिर नाक-कान के जेवर उतारे,और सबूत मिटाने के लिए शव को आग के हवाले कर फरार हो गया। अगले दिन पुलिस को महिला की जली हुई लाश मिली थी, लेकिन तत्कालीन जांच में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया।

नए एसपी की पहल से खुला राज

महासमुंद जिले के नए पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने पदभार संभालते ही पुराने लंबित मामलों पर विशेष ध्यान दिया। उनके निर्देशन में नई टीम गठित कर इस अंधे कत्ल की दोबारा जांच शुरू की गई। लगातार तकनीकी और जमीनी पड़ताल के बाद आखिरकार पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। तुमगांव पुलिस ने आरोपी सूरज ध्रुव को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ, धारा 103(1), 238 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

करीब एक साल बाद न्याय की ओर बढ़ता यह मामला न सिर्फ पुलिस की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं—अपराधी चाहे जितना भी चालाक हो, एक दिन बेनकाब होकर ही रहता है।

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