महासमुंद। जिले के बागबाहरा ब्लॉक स्थित धान उपार्जन केंद्र पर आज शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान ने टोकन नहीं मिलने से क्षुब्ध होकर अपने गले पर ब्लेड चला लिया। गंभीर रूप से घायल किसान को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए पहले महासमुंद मेडिकल कॉलेज और फिर रायपुर रेफर कर दिया गया है। डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक बताई है।
पीड़ित किसान का नाम मनबोध गांडा (उम्र करीब 45 वर्ष) है, जो बागबाहरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बोड़ीदादर सेनभांठा का निवासी है। मनबोध पिछले तीन दिनों से धान बेचने के लिए टोकन कटवाने के चक्कर में चॉइस सेंटर और सहकारी समिति के दफ्तरों के लगातार चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार उसे खाली हाथ लौटना पड़ा।
आज सुबह जब फिर टोकन नहीं कटा तो हताशा में उसने केंद्र परिसर में ही अपनी जेब से ब्लेड निकाला और गला रेत लिया। साथी किसानों और केंद्र कर्मियों ने उसे लहूलुहान हालत में देखा तो शोर मच गया। 112 डायल के जरिए उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे महासमुंद मेडिकल कॉलेज और फिर रायपुर के लिए रेफर कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की घोर लापरवाही करार देते हुए हंगामा शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का वादा तो किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान टोकन के लिए भटकते-भटकते जान दे रहे हैं।
जिले के कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और धान खरीदी केंद्रों पर त्वरित टोकन वितरण के निर्देश जारी किए हैं। फिलहाल घायल किसान मनबोध गांडा की जान बचाने की जद्दोजहद रायपुर के अस्पताल में जारी है। किसानों की इस पीड़ा ने पूरे प्रदेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है।


