महासमुंद। निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2025) अभियान के नाम पर लाखों मतदाताओं को एक बार फिर से फॉर्म भरवाए जा रहे हैं, BLO घर-घर पहुंच रहे हैं, आधार-वोटर कार्ड के साथ 2003 की प्राचीन मतदाता सूची में माता-पिता का नाम खंगाला जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि 2024-2025 में डाटा इंट्री ऑपरेटरों की गलतियों से जो नाम खराब हो गए थे, वही गलत नाम अब SIR-2025 के डेटाबेस में फिर से डाले जा रहे हैं।नतीजा? जनवरी 2026 में जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, तब फिर वही गलत नाम, गलत पता, गलत उम्र दिखेगी। इसके बाद मतदाताओं को फिर से फॉर्म-8 भरकर सुधार कराना पड़ेगा। यानी एक ही गलती का खामियाजा मतदाताओं को दो-दो, तीन-तीन बार भुगतना पड़ेगा।
2003 का सहारा, 2024 की गलती ढकने के लिए? सूत्रों के मुताबिक BLO यह पूछ रहे हैं कि “2003 की मतदाता सूची में आपके माता-पिता या परिवार के सदस्य का नाम पता क्या था?” सवाल यह है कि जब 2003 की SIR सूची में नाम सही थे, तो 22 साल बाद 2024-2025 में अचानक हजारों-लाखों नाम क्यों और कैसे खराब हो गए? डाटा इंट्री का ठेका लेने वाली निजी कंपनियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से हुई इस गलती की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जमीनी हकीकत यह है कि महासमुंद में अभी भी वही पुराने डाटा डाला जा रहा हैं, पिछले साल की गलतियों को दोहराया जा रहा है । अब वे फिर से वही गलत डाटा SIR में कॉपी-पेस्ट कर रहे हैं। मतदाता थक-हारकर फॉर्म भर रहे हैं, लेकिन उनका सुधरा हुआ नाम डेटाबेस में जा ही नहीं रहा।
महासमुंद वार्ड नम्बर 21 निवासी श्रीमती चम्पा विदानी का नाम 2003 के एस आई आर में सही लेकिन 2025 की सूची में चनपा राम विदानी हो गया। इसके अलावा एक ही परिवार के अन्य सदस्यों का नाम भी गलत हो गया है जो 2003 में सही था।
गौरतलब है कि मतदाताओं ने 2025, 2026 में BLO ने SIR फॉर्म भरा, आधार-पैन सब दिखाया, लेकिन ऑनलाइन अभी भी वही गलत नाम दिख रहा है। अब कह रहे हैं जनवरी में सूची आएगी तब फिर फॉर्म-8 भरना हो और नाम सुधरवाना होगा। आखिर बार बार की इस प्रशासनिक गलती के लिए मतदाताओं को कब तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
निर्वाचन आयोग का दावा है कि SIR-2025 से मतदाता सूची 100% शुद्ध हो जाएगी। लेकिन जमीनी स्तर पर BLO को कोई नया सॉफ्टवेयर या ट्रेनिंग नहीं दी गई। पुराने गलत डाटा को ही नया नाम देकर परोसा जा रहा है। जनता जानना चाहती है कि इस तरह की गलती के किए जिम्मेदार कौन?
सवाल अब यह है जब 2003 की सूची नाम सही है जो SIR का आधार है तो 2024_2025 का डेटा क्यों लिया जा रहा है। सीधे सुधार क्यों नहीं किया जा रहा? एक ही गलती के लिए मतदाताओं को बार-बार क्यों सताया जा रहा?
मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ होती है। छत्तीसगढ़ राज्य में यह रीढ़ जानबूझकर कमजोर की जा रही है? या महज अक्षमता का शिकार है – यह सवाल अब सीधे चुनाव आयोग से करना तो बनता है। फिलहाल मतदाता सिर्फ इतना जानना चाहते हैं – उनकी एक गलती नहीं, विभाग की बार-बार की गलतियों की सजा उन्हें क्यों मिल रही है?
मामले ने जब हम जिले के आला अधिकारियों से बातचीत की तो यह जानकारी मिल रहा है कि पोर्टल को इस तरह से बनाया गया की जो पुरानी गलती है उसमें अभी सुधार करना संभव नहीं। SIR सूची प्रकाशन के बाद फिर से पुनः पोर्टल खोला जाएगा तब फिर से मतदाताओं को जिन्होंने गलती की नहीं है उन्हें फिर से फॉर्म 6,7,8 भर कर नाम सुधरवाना होगें।


