महासमुंद। जिले में इन दिनों एक ही चर्चा है कि “कप्तान साहब कब जाएंगे?” यह सवाल अब जिले की गलियों से लेकर चाय की दुकानों तक गूंज रहा है। लोग कहते हैं कि कौन बनेगा करोड़पति के एक करोड़ वाले सवाल का जवाब देना भी आसान है, पर इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कप्तान साहब की जगह लेने शर्मा साहब की चर्चा जोरों पर है। कहा जा रहा है कि शर्मा साहब नए कप्तान के रूप में जिले का कार्यभार संभाल सकते हैं। लेकिन “चर्चा” और “हकीकत” के बीच का फासला अभी भी लंबा दिखाई दे रहा है, क्योंकि कप्तान साहब की कुर्सी अब तक हिली नहीं है।
जिले में कप्तान साहब के समर्थक और खास लोग दावा कर रहे हैं कि साहब जनवरी तक यहीं रहेंगे! उनका कहना है कि कप्तान साहब की पहुंच सीधा केंद्र तक है — और जब तक उनकी इच्छा नहीं होगी, तब तक उन्हें कोई हटा नहीं सकता। आदेश ऊपर से भले आ जाएं, लेकिन नीचे अमल वही होगा जो साहब चाहेंगे।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर उस केंद्र सरकार के आदेश का क्या होगा, जिसमें राज्य सरकार से कहा गया था कि तीन सप्ताह के भीतर कप्तान साहब को बिदाई दें। इस पर कप्तान साहब के नजदीकी लोग मुस्कुराते हुए कहते हैं – “साहब दूसरा आदेश करवा लेंगे!” अब जनता सोच में है कि आदेश किसके लिए होता है – सरकार के लिए या साहब के लिए?
यह बात भी किसी से छिपी नहीं कि कप्तान साहब के आने के बाद जिले में नेताओं की सुनवाई लगभग बंद हो गई है। नेता आदेश तो देते हैं, लेकिन पालन की गारंटी कोई नहीं देता। प्रशासनिक गलियारों में लोग कहते हैं कि कप्तान साहब के कार्यकाल में सिर्फ “काम बोले, नेता चुप हों।”
अभी-अभी कप्तान साहब ने जिले के एक ऐसे व्यक्ति को बेमचा भेज दिया, जिसकी वजह से पूरे जिले में खलबली मच गई है। यह इतना चौंकाने वाला था कि लोग अब मज़ाक में कहने लगे हैं — “बेमचा तो बस नाम है, असर महासमुंद जिले में दिख रहा है!”
कप्तान साहब की सख्ती का असर इतना है कि कुछ लोग देश छोड़कर परदेश चले गए हैं। कहा जा रहा है कि वे तभी वापस आएंगे जब कप्तान साहब का ट्रांसफर हो जाएगा। उनका कहना है कि “अब तो सीजन टाइम है, लेकिन कप्तान साहब हैं कि जाने का नाम नहीं ले रहे।”
अब अगर कप्तान साहब वाकई जनवरी तक रुक गए, तो जिले के कुछ खास लोगों की सांसे ही रुक जाएंगी। एक ने हंसते हुए कहा “अब सर्दी की ठंड से नहीं, कप्तान साहब की ठंड से कांप रहे हैं लोग!” महासमुंद में कप्तान बदलने की प्रक्रिया अब प्रशासनिक नहीं, बल्कि खगोलीय घटना बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं “कब कप्तान साहब का जाना होगा। अगर इस माह ग्रह-नक्षत्र नहीं बदला तो जनवरी तक ग्रहण पड़ेगा!”


