सुकमा/मारेडुमिली। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले और आंध्र प्रदेश की सीमा से सटे मारेडुमिली इलाके में सुरक्षा बलों को नक्सल उन्मूलन अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। आंध्र प्रदेश ग्रेहाउंड्स के अभियान में दहशत फैलाने वाला कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा मारा गया है। सूत्रों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी है। हिड़मा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन-1 का शीर्ष सरगना था और कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।
सुकमा जिले के एर्राबोर क्षेत्र में आज सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच तीव्र मुठभेड़ हुई। विशेष इनपुट मिलने के बाद जवान जंगल में दाखिल हुए थे, जहां घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों के तत्काल जवाबी एक्शन के बाद नक्सली पीछे हटे। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। एक नक्सली के मारे जाने और कई के घायल होने के संकेत मिले हैं। इलाके में अभी भी कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है। आंध्र प्रदेश के मारेडुमिली जंगल में चल रहे संयुक्त ऑपरेशन में ग्रेहाउंड्स को बड़ी कामयाबी मिली। मुठभेड़ में 6 शीर्ष
नक्सली कमांडर मारे गए नक्सली में हिड़मा (Hidma), CCM – PLGA बटालियन का मुखिया, राजे (Raje), DVCM – हिड़मा की पत्नी, चेल्लुरी नारायण @ सुरेश (SZCM) – दक्षिण ज़ोन कमेटी सदस्य, टेक शंकर (Tech Shankar) – आईईडी विशेषज्ञ अन्य दो माओवादियों की पहचान जारी। हिड़मा की मौत की आधिकारिक पुष्टि विश्वसनीय सूत्रों द्वारा कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां अंतिम फॉरेंसिक और दस्तावेज़ी औपचारिकताओं की प्रतीक्षा कर रही हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है हिड़मा का मारा जाना?
बस्तर में पिछले एक दशक में हुए अधिकतर बड़े हमलों (टेकरा, बुर्कापाल, झीरम सहित) में संलिप्त। PLGA बटालियन-1 का संचालनकर्ता, सबसे प्रशिक्षित एवं खतरनाक दस्ते का प्रमुख। केंद्रीय समिति में शामिल होने की चर्चा, लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की टॉप वॉन्टेड लिस्ट में। ग्रेहाउंड्स और छत्तीसगढ़ पुलिस का संयुक्त अभियान अभी जारी है। सुकमा, मारेडुमिली, एर्राबोर के जंगलों में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है। नक्सलियों के कैम्प, सामग्री और हथियारों की बरामदगी को लेकर आधिकारिक जानकारी जल्द जारी की जा सकती है।
अभियान का यह चरण निर्णायक माना जा रहा है हिड़मा की मौत को सुरक्षा एजेंसियां नक्सली गतिविधियों पर बड़ा झटका मान रही हैं। बस्तर और आंध्र सीमा पर नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए यह ऑपरेशन मील का पत्थर माना जा रहा है।


