Saturday, 7 Mar 2026

लंबी हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, अनिल टुटेजा को नियमित जमानत

दूसरी याचिका मंजूर; ट्रायल में विलंब और 18 माह से अधिक न्यायिक हिरासत बना आधार

बिलासपुर। कथित बहुचर्चित शराब घोटाला प्रकरण में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अनिल टुटेजा को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने पारित विस्तृत आदेश में कहा कि जब ट्रायल के निकट भविष्य में पूर्ण होने की संभावना न हो और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हो, तब व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

यह टुटेजा की दूसरी जमानत याचिका थी। पूर्व में अर्जी निरस्त हो चुकी थी, किंतु सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति के मद्देनज़र पुनः जमानत याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी। उच्च न्यायालय ने माना कि आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद ट्रायल आगे नहीं बढ़ा है, जो परिस्थितियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन है।

23 माह के आसपास पहुंची कुल हिरासत

अदालत ने उल्लेख किया कि आवेदक 21 अगस्त 2024 से वर्तमान प्रकरण में न्यायिक हिरासत में है। इससे पूर्व वह प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही में भी समान लेनदेन से जुड़े आरोपों में निरुद्ध रहा। कुल मिलाकर उसकी हिरासत अवधि लगभग 23 माह के आसपास पहुंच चुकी है।

7 चालान, 51 आरोपी, 1,111 गवाह

प्रकरण में अब तक सात आरोप पत्र प्रस्तुत किए जा चुके हैं। अभियोजन ने 51 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है और 1,111 गवाहों को पेश करने का प्रस्ताव रखा है। दस्तावेजी साक्ष्य हजारों पृष्ठों में है। न्यायालय ने कहा कि इतनी व्यापक सुनवाई स्वाभाविक रूप से लंबा समय लेगी। वर्तमान स्थिति में विशेष न्यायालय द्वारा संज्ञान और आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया भी लंबित है, क्योंकि अभियोजन स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

अनुच्छेद 21 का हवाला

अदालत ने कहा कि जब संज्ञान और आरोप गठन ही लंबित हों, तब ट्रायल प्रारंभ होने की समयसीमा अनिश्चित हो जाती है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक कारावास में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के प्रतिकूल होगा।न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि प्रकरण का साक्ष्य मुख्यतः दस्तावेजी है, जिसे जांच एजेंसी जब्त कर चुकी है। आवेदक से किसी प्रकार की नकद राशि या अवैध संपत्ति की बरामदगी नहीं हुई है।

शर्तों के साथ रिहाई

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत केवल लंबी हिरासत और ट्रायल में संभावित विलंब के आधार पर दी गई है, मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। टुटेजा को एक लाख रुपये के निजी मुचलके एवं सममूल्य जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का निर्देश दिया गया है। पासपोर्ट जमा करना, जांच व ट्रायल में सहयोग करना, गवाहों को प्रभावित न करना और बिना अनुमति देश न छोड़ना जैसी शर्तें लागू रहेंगी। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में अभियोजन को जमानत निरस्तीकरण के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है।

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