कोरबा। जिले के शिक्षा विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाली विकासखण्ड में पदस्थ एक शिक्षक पर आरोप है कि उसने मेडिकल एलाउंस के नाम पर न केवल अपने लिए, बल्कि अपनी पत्नी और बेटी के नाम पर भी लाखों रुपये का बिल प्रस्तुत किया। हैरानी की बात यह है कि जिन चीजों का बिल लगाया गया उनमें कोलगेट, स्टेबरी, पाउडर, नवर्तन तेल और जूस जैसी रोज़मर्रा की वस्तुएं शामिल हैं। इन सभी को मेडिकल एलाउंस के अंतर्गत दिखाकर जिला सीएमएचओ (CHMO) कार्यालय से बिल पास करवा लिया गया।
विभागीय मौन पर सवाल_ इतने बड़े खेल के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर मौन साधे हुए हैं। जिससे भ्रष्टाचार को लेकर संदेह और गहरा हो रहा है।
लाखों का चुना_प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। शिक्षकों को मिलने वाले मेडिकल एलाउंस का उपयोग जहां वास्तविक इलाज और दवाओं के लिए होना चाहिए, वहीं इस प्रकार के फर्जी बिलों से यह योजना भ्रष्टाचार का शिकार होती दिख रही है।
जांच की मांग_स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एक शिक्षक इस तरह का खेल कर सकता है, तो संभव है कि अन्य जगहों पर भी इसी तरह के घोटाले चल रहे हों।
जिम्मेदारों की चुप्पी_RTI से मिले दस्तावेज यह साबित करते हैं कि बिल पास करने में जिला स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की मिलीभगत हो सकती है। लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है।


