Saturday, 7 Mar 2026

कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड की अवैध खुदाई और पानी निकासी का 5 वीं बार प्रयास विफल

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के तुमगांव क्षेत्र में स्थित करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड खैरझिटी-कौंवाझर इलाके ने एक बार फिर गोपालपुर एनीकट से अवैध रूप से पानी निकालने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय सत्याग्रही किसानों के कड़े विरोध के कारण यह प्रयास पूरी तरह विफल हो गया। यह कारखाने का पानी लेने का पांचवीं बार असफल प्रयास बताया जा रहा है।

ग्रामीण किसान लंबे समय से कंपनी पर अवैध खुदाई, पाइपलाइन बिछाने और गोपालपुर एनीकट से पानी की निकासी का आरोप लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि कंपनी के ये प्रयास क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था, भूमिगत जल स्तर और किसानों की फसलों को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं। कंपनी के ये कदम जल अभावग्रस्त घोषित इलाके में और भी विवादास्पद हो गए हैं।

तुमगांव से खैरझिटी जाने वाले मार्ग पर गोपालपुर एनीकट के पास कंपनी ने खुदाई शुरू की और पानी लेने की तैयारी की। जैसे ही ग्रामीणों को खबर मिली, सैकड़ों सत्याग्रही किसान मौके पर पहुंचे। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया और कंपनी के कर्मचारियों को काम रोकने पर मजबूर कर दिया। किसानों ने नारे लगाए – “अवैध कारखाना बंद करो”, “हमारा पानी, हमारा अधिकार” और “किसानों के साथ अन्याय नहीं चलेगा”।

छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के सत्याग्रही किसान पहले से ही कंपनी के खिलाफ आंदोलनरत हैं। उनका आरोप है कि कंपनी अवैध रूप से संचालित हो रही है और इसमें प्रदूषण, अवैध निर्माण, भूमि अतिक्रमण और पानी की लूट जैसी गतिविधियां शामिल हैं। किसान नेता अशोक कश्यप और अन्य ने कहा कि कंपनी के कारण क्षेत्र में जल संकट बढ़ रहा है, जबकि जिला पहले से ही जल अभावग्रस्त घोषित है।

किसानों की प्रमुख मांगें है कि कंपनी की सभी अवैध गतिविधियां तत्काल बंद की जाएं। गोपालपुर एनीकट से पानी निकासी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।प्रशासन द्वारा पहले से की गई तालाबंदी को सख्ती से लागू किया जाए। प्रदूषण और अवैध खुदाई के लिए सख्त कार्रवाई हो।

यह घटना नई नहीं है। पिछले सालों में भी कंपनी पर प्रशासनिक तालाबंदी लगाई गई थी, जिसका किसानों ने खुलकर समर्थन किया। नवंबर 2025 में सत्याग्रही किसानों ने कंपनी पर प्रशासनिक कार्रवाई का स्वागत किया और आगे आंदोलन तेज करने की घोषणा की थी। कंपनी पर हादसों, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और श्रमिकों के शोषण के भी आरोप लग चुके हैं।

स्थानीय प्रशासन ने पहले जांच टीम गठित की थी और कुछ कार्रवाई की थी, लेकिन किसान आरोप लगाते हैं कि कार्रवाई पूरी तरह प्रभावी नहीं हुई। किसान मोर्चा ने कलेक्टर को कई बार आवेदन दिए हैं, जिसमें माइंस बोर और पानी निकासी पर प्रतिबंध की मांग की गई है।

सत्याग्रही किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे दिल्ली किसान आंदोलन की तर्ज पर सतत संघर्ष जारी रखेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो वे और बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है – “हम अपनी जमीन, पानी और फसलों की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर तैयार हैं।” यह घटना छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और किसानों के अधिकारों के बीच चल रहे टकराव को एक बार फिर उजागर करती है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही निर्णायक कदम उठाएगा।

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