महासमुंद। पिथौरा तहसील क्षेत्र में एक नेत्रहीन महिला की न्यायिक आदेश के बावजूद भूमि पर कब्ज़ा हटाने की कार्यवाही ठप पड़ी हुई है। ग्राम जगदीशपुर निवासी सरिता कोंध, जो 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित (नेत्रहीन) हैं, ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें उनकी पैतृक ज़मीन का कब्जा पुलिस बल की मौजूदगी में वापस दिलाया जाए। सरिता कोंध ने कलेक्टर महासमुंद को दिए गए ज्ञापन में बताया है कि उनके नाम से ग्राम साल्हेतराई एवं खुर्शीपहार (रा.नि.म. देवरी, तहसील पिथौरा) में एकल खाता भूमि दर्ज है। न्यायालय नायब तहसीलदार पिथौरा द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 202103122800037 वर्ष 2020-21 में धारा 250 के तहत कब्ज़ा हटाने का आदेश 31 जुलाई 2023 को पारित किया जा चुका है।
अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई से इंकार, पटवारी और आरआई पर मिलीभगत के आरोप
नेत्रहीन महिला सरिता कोंध ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि हल्का पटवारी, आर.आई., सरपंच, कोटवार तथा विपक्षी पक्षकारों, फिरन फूलसाय, जयमल, कुलदीप, कमल, प्रधान, सबोध कुमार, सत्यप्रकाश, कुमार, सत्यकुमार, अशोक, आदम, इब्राहिम कुमार और शांतिकुमार — की मिलीभगत से प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर कार्यवाही को रोका जा रहा है। सरिता ने बताया कि जब वह कब्जा दिलाने की मांग लेकर गईं, तो अशोक कुमार ने उन्हें फाड़कर मार डालने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि “विपक्षी पक्ष खुलेआम कह रहे हैं कि ‘पुलिस भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।’”
डीएसपी से लेकर तहसीलदार तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
सरिता कोंध ने बताया कि उन्होंने इस प्रकरण की जानकारी डीएसपी महासमुंद को भी दी है, परंतु अब तक किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि पुलिस बल की मौजूदगी में और अन्य जिला अधिकारियों की उपस्थिति में कब्जा हटाकर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
न्यायालय आदेश हुआ जारी, पर पालन नहीं, बेदखली वारंट भी निष्पादित नहीं हुआ न्यायालय नायब तहसीलदार पिथौरा द्वारा दिनांक 18 जून 2025 को “बेदखली वारंट” (धारा 250 के तहत) जारी किया गया है, जिसमें माल जमादार, पिथौरा को आदेशित किया गया है कि वह आवेदिका सरिता पिता पुनीत की भूमि खसरा नं. 450/2 रकबा 0.49 हे. (ग्राम खुर्शीपहार) से अनावेदक फिरन कुमार पिता गोपीराम को बेदखल कर आवेदिका को कब्जा दिलाए।इस आदेश की प्रति थाना प्रभारी सांकरा, राजस्व निरीक्षक देवरी, हल्का पटवारी तथा ग्राम पंचायत खुर्शीपहार के सरपंच को भी भेजी गई थी ताकि आवश्यक सहयोग और शांति व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। फिर भी, आदेश पारित हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है, पर कब्जा दिलाने की कार्यवाही अब तक अधर में लटकी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, ‘नेत्रहीन महिला को न्याय कब?
स्थानीय सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने भी इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब एक न्यायालय आदेश और बेदखली वारंट मौजूद है, तब कार्यवाही रोकने का कोई औचित्य नहीं है। अगर एक 100 प्रतिशत नेत्रहीन महिला को भी न्याय नहीं मिल रहा, तो आम गरीब नागरिक कैसे उम्मीद रखेगा? यह सवाल अब पिथौरा से लेकर महासमुंद तक गूंज रहा है।





