महासमुंद। ज़िले के नये पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति को लेकर इस समय नवा रायपुर मंत्रालय से लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) तक असाधारण हलचल मची हुई है। एक साधारण ट्रांसफ़र आदेश जिसने सामान्यतः दो-तीन नामों पर सीमित रहना चाहिए था, वह अब छत्तीसगढ़ पुलिस की वर्ष 2025 की सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी पोस्टिंग स्टोरी बन चुका है। “महासमुंद SP” की कुर्सी इस कदर सुर्खियों में आ गई है कि प्रशासनिक गलियारों से लेकर मैस तक हर जगह सिर्फ़ एक ही सवाल गूंज रहा है—आख़िर यह ताज किसके सिर सजेगा?
अंदरखाने की फुसफुसाहट अब खुले विमर्श में बदल चुकी है। पुलिस कैडर में RR (Regular Recruit) और SPS (Promotee IPS) खेमों के बीच मुकाबला इतना तीखा हो गया है कि अधिकारी भी निजी तौर पर इस स्थिति को “शक्ति-संतुलन की सबसे बड़ी परीक्षा” मान रहे हैं। RR खेमे में 2013 बैच के मोहित गर्ग और जितेन्द्र शुक्ला, 2014 बैच के चन्द्रमोहन सिंह और 2017 बैच के सुनील शर्मा शामिल हैं—ये सभी UPSC चयनित, NPA हैदराबाद प्रशिक्षित अधिकारी, जिनकी प्रशासनिक क्षमता और प्रोफ़ेशनल प्रोफ़ाइल इनको मजबूत दावेदार बनाती है। वहीं दूसरी ओर SPS से IPS बने वेदव्रत सिरमौर, श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, राजेश कुकरेजा और मनोज खेलारी भी उतने ही दमदार नाम हैं, जिनके पास वर्षों का वास्तविक फील्ड अनुभव और जमीनी पुलिसिंग की पकड़ मानी जाती है। दोनों खेमों के बीच यह खींचतान फाइल को लगातार भारी बनाती जा रही है।
महासमुंद SP की सीट को लेकर अचानक बढ़ी यह दिलचस्पी कोई संयोग नहीं। सूत्र बताते हैं कि यह जिला राजनीतिक रूप से संवेदनशील, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और प्रशासनिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यही वजह है कि यह पोस्टिंग मौजूदा समय में “सबसे lucrative” मानी जा रही है—जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और चुनौती, तीनों का अनोखा संगम है। पर जिस बात ने इस चर्चा को और गहरा रंग दिया है वह है 600 करोड़ रुपये के कथित कोल घोटाले से जुड़ी एक “दूर की कड़ी” का दावा, जिसने इस फाइल को महज़ प्रशासनिक निर्णय से बाहर निकालकर हाई-विज़िबिलिटी और हाई-सेंसिटिविटी का रूप दे दिया है। आधिकारिक पुष्टि भले न हो, लेकिन PHQ के कुछ अनुभवी अधिकारी स्वीकारते हैं कि इस whisper ने माहौल गरमा दिया है।
इसी बीच अलग-अलग प्रभाव केंद्रों की सक्रियता की बातें भी सतह पर तैर रही हैं। एक बेहद प्रभावशाली गैर-राजनीतिक व्यक्तित्व पर एक RR अधिकारी के पक्ष में दबाव बनाने की चर्चा है, तो दूसरी तरफ़ कुछ शीर्ष राजनीतिक पदों पर बैठे लोग दो SPS अधिकारियों को तरजीह देने की कोशिश में बताए जा रहे हैं। नतीजा—फाइल आगे बढ़ने के बजाय गोल-गोल घूम रही है और मेरिट, अनुभव तथा पारदर्शिता की बहस और तेज़ हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर एक वरिष्ठ IG रैंक अधिकारी का तीखा लेकिन सटीक बयान माहौल को और गरमा गया। नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर उन्होंने कहा—“यह पोस्टिंग अब अफवाहों और लॉबिंग का मैदान बन चुकी है। अगर यह स्थिति जारी रही तो बेहतर होगा कि सभी नामों को खारिज कर एक योग्य, शांत प्रोफ़ाइल वाले अधिकारी को नियुक्त किया जाए, ताकि विभाग की गरिमा बची रहे।”
फिलहाल, स्थिति जस की तस है। फाइल चर्चाओं के बीच घूमती रहती है, दावेदारों के नाम सूचियों में ऊपर-नीचे होते रहते हैं, और हर दिन नये संकेतकों की अटकलें सामने आती हैं। लेकिन निर्णायक हस्ताक्षर अभी भी प्रतीक्षारत हैं। और इसी वजह से सस्पेंस और भी गहरा जाता है—महासमुंद को नया SP तो मिलेगा, पर कौन होगा वह अधिकारी? यही सवाल अब छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन का सबसे बड़ा पोस्टिंग-थ्रिलर बन चुका है।


