अमरकंटक। छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे पवित्र अमरकंटक और मैकल बायोस्फियर रिजर्व आज पर्यावरण, नदियों की जन्मस्थली और आस्था के केंद्र के बजाय खनन माफिया के खौफ का पर्याय बन चुके हैं। 8 जनवरी 2026 की शाम, जब वरिष्ठ पत्रकार सुशांत गौतम अपनी टीम के साथ अवैध उत्खनन की तस्वीरें और वीडियो कैद कर लौट रहे थे, तब धनौली क्षेत्र में माफिया ने उन्हें घेर लिया।
सफेद कार, भीमकाय हाईवा और पीछे से तीसरी गाड़ी—सड़क पल भर में जंग का मैदान बन गई। लोहे की रॉड से हमला, गाड़ियों के शीशे तोड़े गए, सुशांत का चेहरा लहूलुहान कर दिया गया और साक्ष्य मिटाने के लिए मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। यह हमला मात्र एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सच उजागर करने वाले कैमरे और कलम पर था।
नामजद आरोपी और गंभीर धाराएं
मरवाही थाने में FIR क्रमांक 0014/2026 दर्ज की गई है। आरोपियों में शामिल हैं। जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू), सुधीर बाल लल्लन तिवारी, भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 126(2), 296, 115(2), 351(3), 324(4), 304, 3(5) लगाई गई हैं, जो पूर्व नियोजित और संगठित अपराध की ओर इशारा करती हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या रसूखदार आरोपियों तक कानून का हाथ पहुंचेगा?
मरवाही वनमंडल की रिपोर्ट साफ है—पमरा क्षेत्र में क्रेशर माफिया ने नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं- बायोस्फियर रिजर्व में 250 मीटर की अनिवार्य दूरी का उल्लंघन, भारी मशीनें और डायनामाइट धमाकों से पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है।
यह सब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद हो रहा है। वन विभाग की चेतावनी के बाद भी अनूपपुर खनिज विभाग ने कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है?
पत्रकार कुमार जितेंद्र ने सिस्टम पर तीखा प्रहार करते हुए कहा क्या हर बार किसी पत्रकार को शहीद होना पड़ेगा, तभी सरकार जागेगी? क्या छत्तीसगढ़ में माफियाओं को खुली छूट अब परंपरा बन चुकी है?”
जानलेवा हमले के बावजूद सुशांत गौतम का बयान व्यवस्था के लिए चुनौती है। यह हमला उनकी बौखलाहट है। वे सच से डरते हैं। झूठे केस, धमकियां—सब आजमा रहे हैं, लेकिन मैकल की बर्बादी का सच अब दबेगा नहीं।” मैकल पर्वत केवल पत्थर नहीं—यह नर्मदा, सोन और जोहिला जैसी नदियों की जन्मस्थली है। करोड़ों लोगों की आस्था और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि आज एक पत्रकार को सच दिखाने पर सड़क पर पीटा जा सकता है, तो कल कोई भी आम नागरिक सुरक्षित नहीं रहेगा।
समय अब कागजी कार्रवाई का नहीं तत्काल गिरफ्तारी, अवैध क्रेशरों पर सीधी बुलडोजर कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। अन्यथा अमरकंटक में संविधान नहीं, माफिया का समानांतर राज चलता दिखेगा। सच दिखाने पर लहू बहाने वाले माफिया को अब रोकना होगा—क्योंकि कलम झुकेगी नहीं!


