महासमुंद। चक्रधर समारोह के चौथे दिन शनिवार को कार्यक्रम की शुरुआत रायपुर से आईं ओडिशी नृत्यांगना शिवली देवता की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। शिवली देवता, जो महासमुंद जिले के ग्राम गौरटेक (विकासखंड बसना) की मूल निवासी हैं, एक कुशल और निपुण ओडिशी नृत्यांगना के रूप में जानी जाती हैं। ओडिशी नृत्य की उत्पत्ति उड़ीसा के मंदिरों से मानी जाती है और यह नृत्य अपनी लयबद्ध गतियों, जटिल पदचालन और मंदिरों की मूर्तियों में उकेरी गई मुद्राओं की जीवंत झलक के लिए प्रसिद्ध है।
शिवली ने अपनी कोमल मुद्राओं, भावपूर्ण अभिनय और तालबद्ध प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय महाकाव्यों की कालजयी कथाओं को मंच पर जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने आध्यात्मिक अर्पण के रूप में अनुभव किया, जिसने पुरातन परंपरा और वर्तमान समय के बीच गहरा संबंध स्थापित किया।
इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से पुरी के भगवान जगन्नाथ स्वामी पर आधारित मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध गतियों से सजी यह प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गई।
गौरतलब है कि शिवली देवता को देशभर के कई प्रतिष्ठित मंचों पर उनके उत्कृष्ट नृत्य प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जा चुका है।


