Saturday, 7 Mar 2026

सम्मान सुविधा या डिजिटल निगरानी? आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आज़ादी पर सवाल

महासमुंद। राज्य सरकार द्वारा “सम्मान सुविधा प्रणाली” के नाम पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मोबाइल एप्लीकेशन में दो नए फीचर्स जोड़े गए हैं, जिन पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। जहां एक ओर इसे व्यवस्थागत पारदर्शिता और तकनीकी प्रगति का नाम दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह व्यवस्था कार्यकर्ताओं की निजता और गरिमा के खिलाफ जाती नजर आ रही है।

लाइव फोटो खींचो – नहीं तो अनुपस्थित!”

नए नियमों के तहत पहली बार आंगनबाड़ी केन्द्र की लाइव तस्वीर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। पुराने फोटो को मान्य नहीं किया जाएगा क्योंकि लोकेशन आधारित मेटा डेटा स्वतः एप में संलग्न हो रहा है। यानि सरकार अब न केवल फोटो मांग रही है बल्कि यह भी ट्रैक कर रही है कि वह कहाँ से लिया गया। यह कदम सवाल खड़े करता है कि क्या आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब हर वक्त निगरानी में रहकर काम करना होगा? क्या यह उनके काम के प्रति अविश्वास का संकेत नहीं है?

दूसरा फीचर – डिजिटल हाजिरी और मानसिक दबाव

दूसरे फीचर के अनुसार, जब भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एप में अपनी दैनिक उपस्थिति (FRS के माध्यम से) दर्ज करेंगी, उन्हें एक नोटिफिकेशन के जरिए बताया जाएगा कि उन्होंने समय पर उपस्थिति दर्ज की या नहीं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग अब कार्यकर्ताओं को डिजिटल चाबुक से समय के अनुशासन में बांधना चाहता है।

क्या यह सम्मान है या नियंत्रण?

‘सम्मान सुविधा प्रणाली’ नाम के पीछे छिपी यह व्यवस्था वास्तव में सम्मान दे रही है या निगरानी तंत्र बनकर उभर रही है, यह विचारणीय है। कार्यकर्ताओं को बिना प्रशिक्षण या तकनीकी सहायता के सीधे डिजिटल जवाबदेही में झोंक देना कहीं उनके काम के बोझ को और नहीं बढ़ा रहा?

श्रम संगठनों से प्रतिक्रिया की मांग

इस पूरी प्रक्रिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या उनके संगठनों से कोई सलाह या सहमति नहीं ली गई है। क्या यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं है? क्या सरकार अपने ही कर्मचारियों की गरिमा और आत्मसम्मान को ताक पर रख रही है?

किसकी सुविधा? किसका सम्मान?

इन तकनीकी व्यवस्थाओं को ‘सुविधा’ कहकर लागू करना शायद उचित नहीं जब तक इसमें कार्यकर्ताओं की सहमति, सरलता और आत्म-सम्मान सुनिश्चित न किया जाए। सवाल यह भी है कि जब सरकार स्वयं विभागीय कार्यों की जवाबदेही से बचती है, तो वह जमीनी कार्यकर्ताओं पर एकतरफा निगरानी क्यों थोप रही है

तकनीकी प्रगति के नाम पर काम करने वालों की निजता और आत्मसम्मान को नजरअंदाज करना एक खतरनाक प्रवृत्ति है। अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले समय में यह पूरी सेवा व्यवस्था में विद्रोह, अविश्वास और मानसिक तनाव को जन्म दे सकती है। सरकार को चाहिए कि वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करे, न कि उन्हें एप्स और कैमरों से नियंत्रित करे।

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