महासमुंद। जनपद पिथौरा अंतर्गत ग्राम किशनपुर में पंचायत सचिव पुनीत सिन्हा पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गुरुवार को ग्रामीणों और उप सरपंच ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और सचिव को तत्काल हटाने तथा न्यायिक कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव ने ग्राम पंचायत सरपंच के साथ मिलकर सरकारी खजाने पर डाका डाला है। ग्राम विकास, सड़क, नाली, बिजली, पाली और सफाई जैसे कार्यों में भारी आर्थिक अनियमितताएं की गई हैं। यही नहीं, सरपंच के रिश्तेदारों के नाम पर लाखों रुपए का फर्जी आहरण करने के अलावा, स्वयं सरपंच के नाम पर भी हाल ही में 18 हजार रुपए का चेक जारी किया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि मामले की शिकायत पिथौरा क्षेत्र के सीओ और जिला पंचायत सीओ से भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 11 सितम्बर तक सचिव का स्थानांतरण नहीं हुआ तो 12 सितम्बर से जनपद पंचायत पिथौरा के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
पंचायत अधिनियम के प्रावधान
पंचायत अधिनियम के अनुसार ग्राम पंचायत सचिव वित्तीय कार्यों का अभिलेख व भुगतान प्रक्रिया का जिम्मेदार होता है। किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता सामने आने पर सचिव को निलंबित कर विभागीय जांच, सेवा समाप्ति और यहां तक कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।
वहीं सरपंच को अपने नाम से चेक लेने का कोई अधिकार नहीं है। भुगतान केवल कार्यों, आपूर्तिकर्ताओं, मजदूरों या योजना लाभार्थियों के नाम पर ही हो सकता है। यदि सरपंच या उसके रिश्तेदारों के नाम से चेक जारी हुआ है तो यह भी गंभीर वित्तीय अनियमितता मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में पंचायत अधिनियम की धारा 40(अ) और 40(ब) के तहत सरपंच को पद से हटाने की कार्यवाही के साथ-साथ अनियमित राशि की वसूली और आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


