Saturday, 7 Mar 2026

बलरामपुर में ‘मग्गू सेठ’ पर गंभीर आरोप, आदिवासी भूमि हड़पने और मौतों का जिम्मेदार ठहराया

अंबिकापुर। वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार जायसवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक व्यंग्यपूर्ण पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में कथित खनन माफिया विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ और उनके भाई प्रवीण अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में व्यंग्य के जरिए सेठ को ‘कलयुगी मसीहा’ और ‘महापुरुष’ बताते हुए उन पर आदिवासी भूमि की बेनामी खरीद, अवैध खनन, मौतों की घटनाओं और सबूत नष्ट करने जैसे आरोपों को उजागर किया गया है। पत्रकार ने मांग की है कि सेठ को कानून से ऊपर घोषित किया जाए और पीड़ितों को ही सजा दी जाए।

पत्र में उल्लेखित प्रमुख आरोप:आदिवासी भूमि हड़पना_ सेठ पर आरोप है कि उन्होंने पहाड़ी कोरवा (राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र समुदाय) और अन्य आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीन दलालों के जरिए हड़पी। इससे तंग आकर भैराराम जैसे आदिवासी आत्महत्या कर रहे हैं।

-क्रशर प्लांट में मौतें_महामाया स्टोन क्रशर में 2022 में एक आदिवासी युवक शिव नारायण की मौत और अन्य घटनाएं हुईं। प्लांट को पहले सील किया गया था, लेकिन बाद में फिर चालू कर दिया गया।

सबूत मिटाना_ खनिज विभाग को करोड़ों का चूना लगाने के बाद विभागीय कार्यालय में आग लगवाकर फाइलें जलाने का आरोप। पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से फरार होने के बावजूद घर में शादी-अनिवर्सरी मनाना और पुलिस का न पकड़ पाना। पत्रकारों पर दबाव**: विरोध करने वाले पत्रकारों को झूठे मुकदमों में फंसाना।

सेठ का आपराधिक रिकॉर्ड

पत्र में संलग्न सूची के अनुसार, थाना राजपुर और चौकी बरियों में 2009 से 2021 तक दर्ज मामले में मारपीट, धमकी, बलवा, अपहरण (धारा 147, 148, 294, 506, 323 आदि)। SC/ST एक्ट के तहत मामले। लापरवाही से मौत (धारा 304-II) सहित गंभीर आरोप। कुल 9 से अधिक मामले, जिनमें कुछ अनसुलझे हैं।

बलरामपुर में पहाड़ी कोरवा समुदाय की आत्महत्याओं और भूमि विवादों को लेकर पहले भी प्रदर्शन हो चुके हैं। सर्व आदिवासी समाज ने सेठ बंधुओं पर अवैध कब्जे के आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग की है। हाल ही में हाईकोर्ट ने सेठ की जमानत याचिका खारिज की थी।

श्री जायसवाल ने व्यंग्य के जरिए प्रशासनिक मिलीभगत और कानून के दुरुपयोग पर तंज कसा है। उन्होंने इसे ‘व्यंग्यात्मक सत्य’ बताते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। जिला प्रशासन और पुलिस ने अभी इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मामले की जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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