अब सरकारी जांच में भी किसानों की शिकायत सही साबित — खेतों में राख, फसलें बर्बाद, ज़मीन बंजर
महासमुंद। जिले का बहुचर्चित करणी कृपा पावर प्लांट अब किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है। इस प्लांट से निकलने वाली औद्योगिक राख और धुएं से खेतों की उपजाऊ मिट्टी बंजर होती जा रही है, फसलें जल रही हैं और किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।अब इस पूरे मामले की पुष्टि खुद जिला कृषि विभाग ने भी कर दी है।
जांच में सही साबित हुई किसानों की पीड़ा।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रभावित किसानों ने 02 जुलाई 2025 को कलेक्टर जनदर्शन (टोकन नं. 2120225000710) में शिकायत दर्ज कराई थी कि करणी कृपा स्टील एवं पावर प्लांट के प्रदूषण से उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं और उत्पादन लगातार गिर रहा है। इस पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने त्वरित संज्ञान लेते हुए कृषि विभाग को जांच का आदेश दिया। आदेश क्रमांक: क्र./स्था./जनदर्शन/2025-26/3641 दिनांक: 08.07.2025 के तहत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को जांच सौंपा गया।
पंचायतनामा रिपोर्ट से पुष्टि — राख से खेतों में जमा हुई परत, फसलें जली हुई पाई गईं
जांच टीम दिनांक 05.08.2025 को खरसीडीह गांव में मौके पर पहुंची, जहां स्थानीय किसानों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया। इसमें साफ लिखा गया है। फसल पर राख जैसी परत जमा थी, जिससे सरकारी समिति द्वारा खरीदी मना की जाती है। खेतों में फसलें जली हुई पाई गईं और राख की मोटी परतें दिखीं। पंचनामा में 13 से अधिक ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर इसकी पुष्टि की है, जिनमें सरपंच प्रतिनिधि, उपसरपंच, किसान, भूमिपति और पंच शामिल हैं।
प्रमुख गवाह व हस्ताक्षरकर्ता: 1. फूलचंद नेताम (सरपंच प्रतिनिधि) 2. संतलाल वर्मा (उपसरपंच) 3. दीनदयाल साहू, नारायण यादव, बैजनाथ साहू, संजय यादव, कोबिंद यादव, कुंवर सेन सहित 13+ किसान
संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप – पावर प्लांट बना अवैध कब्जे पर, संघर्ष जारी
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक दयानंद वर्मा का आरोप है कि करणी कृपा पावर प्लांट ने किसानों, आदिवासियों और सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया है। यह पावर प्लांट न सिर्फ कानून विरोधी है, बल्कि यह हजारों किसानों की जीविका पर सीधा हमला है।”
अब आगे क्या?
अब जब कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच और पंचनामा रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि पावर प्लांट की राख से किसानों को नुकसान हुआ है, ऐसे में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर है। किसानों की माँग है कि:
पावर प्लांट प्रबंधन से मुआवज़ा वसूल किया जाए
किसानों को भविष्य के लिए राहत व मुआवजा पैकेज दिया जाएपर्यावरणीय स्वीकृति और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच हो। प्रशासन इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करे। प्रभावित किसानों को राहत दे। पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई करे।



