महासमुंद। सर्व अनुसूचित जाति समाज ने राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) के आरक्षण को जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाने और संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग को लेकर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम से दिया गया।
समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 2011 की जनगणना के आधार पर अनुसूचित जाति की जनसंख्या लगभग 11.6 प्रतिशत थी, लेकिन 2012 में तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार ने आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया। बाद में पिछली कांग्रेस सरकार ने इसे 13 प्रतिशत करने का प्रयास किया, लेकिन यह लागू नहीं हो सका। वर्तमान में राज्य में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में एससी के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण लागू है (कुल आरक्षण विवादित 58 प्रतिशत के फॉर्मूले में एससी 12%, एसटी 32%, ओबीसी 14%)।
ज्ञापन में कहा गया कि पिछले 15 वर्षों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही 2012 के बाद सारथी, सुत सारथी, सहिस, सईस, थनवार जैसी कई जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है। समाज का अनुमान है कि वर्तमान में अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या 18 से 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसलिए आरक्षण को जनसंख्या अनुपात में बढ़ाकर कम से कम 16 प्रतिशत या उससे अधिक करने की मांग की गई, ताकि सरकारी नौकरियों, शिक्षा और राजनीतिक क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
संत रविदास जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की मांग पर जोर देते हुए ज्ञापन में उल्लेख किया कि संत रविदास जी के समतामूलक सिद्धांत पूरे विश्व में विख्यात हैं। उनके अनुयायी छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश में बड़ी संख्या में हैं। यह जयंती माघ पूर्णिमा को मनाई जाती है और सामाजिक समानता की भावना को मजबूत करने के लिए अन्य कई संतों/त्योहारों की तरह राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से शामिल थे— विजय बंजारे (संरक्षक), रेखराम बघेल (जिलाध्यक्ष), टोमन सिंह कागजी, मदन भारती (जिला उपाध्यक्ष, गाड़ा समाज), राजेश रात्रे, पवन घृतलहरे, डगेश्वर डहरिया, रितुराज बघेल, रामकृष्ण मिरी (रविदास समाज प्रमुख), मुलचंद रौतिया (महासमुंद नगर अध्यक्ष), चैतराम मिरी, रवि अजगल्ले, गणेश राम मिरी, भवानी शंकर मिर्धा सहित अन्य समाजजन। समाज ने अपील की है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द इन मांगों पर सकारात्मक विचार करे और अनुसूचित जाति समाज के हित में आवश्यक कदम उठाए।


