Saturday, 7 Mar 2026

सुआ नृत्य हमारी संस्कृति और एकता का प्रतीक_केशव

बागबाहरा। विकासखंड बागबाहरा के ग्राम पंचायत सिर्री पठारीमुंडा में पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सुआ नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। दीपावली पर्व के उपरांत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपरा की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसमें क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद पंचायत अध्यक्ष केशव नायक एवं राम चंद्राकर रहे, जिन्होंने ग्राम देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के पश्चात दीप प्रज्वलित कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला पंचायत सभापति रवि साहू, जनपद उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार, सरपंच भानमति ध्रुव, हेमंत साहू, कौशल साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे और मंच संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा सुआ नृत्य, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और नारी सृजनशीलता का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सुआ गीत की ताल पर नृत्य कर ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा ग्राम लोक-भावना और सांस्कृतिक उमंग से गूंज उठा। तोते (सुआ) के प्रतीक माध्यम से प्रकृति, प्रेम और जीवन के रंगों की झलक ने दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन में जय शिव शक्ति महिला समूह की भूमिका सराहनीय रही। समूह की अध्यक्ष केसरी दीवान, मथुरा बाई दीवान, संतोषी दीवान और गोकुल दीवान सहित सभी सदस्यों ने व्यवस्थापन और संचालन में उल्लेखनीय योगदान दिया, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य रवि फड़ोदिया, प्रीतम पटेल, नेमीचंद यादव, लक्ष्मण यादव, हरक दीवान, थानसिंह दीवान, परसराम दीवान, टिकेश्वर, कन्हैया, केवल पटेल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के अंत में विजेता दलों को पारितोषिक एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि केशव नायक एवं राम चंद्राकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि  “सुआ नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं और हमारी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाते हैं।”

उन्होंने महिला समूहों के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि महिलाएं समाज की सशक्त कड़ी हैं, और उनकी सक्रिय भागीदारी से ही ग्राम का सर्वांगीण विकास संभव है। कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों ने सामूहिक लोकगीत गाकर उत्सव का आनंद साझा किया। सैकड़ों ग्रामीणों, महिला समूहों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति से यह आयोजन लोक परंपरा, संस्कृति और सामूहिक एकता का सजीव प्रतीक बन गया।

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