Saturday, 7 Mar 2026

मनोरमा इंडस्ट्रीज के मंसूबों पर कलेक्टर ने फेर दिया पानी!

महासमुंद। जिले में ग्राम बिरकोनी के ग्रामीणों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब जनता एकजुट होकर लड़ती है, तो कोई भी ताकत उन्हें हरा नहीं सकती। लंबे संघर्ष, लगातार विरोध प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार जिला प्रशासन ने मनोरमा इंडस्ट्रीज को दी गई सरकारी भूमि का आवंटन पूरी तरह निरस्त कर दिया है। यह फैसला न सिर्फ ग्रामीणों की जीत है, बल्कि पारदर्शिता, कानून का पालन और आम जनता के हितों की जीत है।

मनोरमा इंडस्ट्रीज ने अपनी पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल कर बिरकोनी क्षेत्र की लगभग 3.48 हेक्टेयर सरकारी भूमि (खसरा संख्या 2435, 2436, 2619, 2620, 2614 तथा 2616) को औद्योगिक प्रयोजन के लिए हथियाने की कोशिश की थी। यह भूमि शासकीय चारण/शासकीय उपयोग की श्रेणी में आती है, जिसमें चारागाह, श्मशान घाट जैसी सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं। ग्रामीणों के भारी विरोध के बावजूद कंपनी ने इसे अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों की दृढ़ता और सच्चाई ने सब कुछ बदल दिया।

कलेक्टर महासमुंद ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए आवंटन को अवैध घोषित कर दिया। प्रमुख कारण बिल्कुल साफ हैं:- भूमि का शासकीय चारण/सार्वजनिक उपयोग होना। उच्च न्यायालय के पुराने आदेशों (10 मार्च 2011 और अन्य) का स्पष्ट उल्लंघन, जिसमें इस भूमि को किसी निजी या व्यावसायिक परियोजना के लिए हस्तांतरित न करने का निर्देश था। आवेदक द्वारा आवश्यक शर्तों और नियमों की अनदेखी, ग्रामीणों और संबंधित विभागों की मजबूत आपत्तियां। कलेक्टर ने साफ कहा है कि अब इस भूमि पर किसी भी निजी कंपनी या व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह भूमि हमेशा ग्राम स्तर पर कृषि, पशु चराई, गोठान, तालाब सुधार, सार्वजनिक निर्माण या अन्य सामुदायिक कार्यों के लिए सुरक्षित रहेगी।

यह जीत आसान नहीं थी! ग्रामीणों ने महीनों तक विरोध किया, ज्ञापन दिए, कलेक्ट्रेट पहुंचे, तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया। उन्होंने अपनी जमीन, अपनी आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ाई लड़ी। कई ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से इस भूमि को सार्वजनिक उपयोग में लाने की मांग कर रहे थे और अतिक्रमण रोकने के लिए संघर्षरत थे।

आज पूरे बिरकोनी में राहत की लहर है। ग्रामीण खुशी से कह रहे हैं – “हमारी मेहनत रंग लाई! हमने साबित कर दिया कि गरीब की आवाज भी सुनी जाती है, अगर वो हार न माने।” यह फैसला न केवल बिरकोनी के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा है कि जब सच्चाई और एकजुटता साथ हो, तो कोई भी बड़ा खेल हार जाता है। जिला प्रशासन का यह कदम सराहनीय है, क्योंकि इसने कानून का पालन सुनिश्चित किया और आम जनता के हितों को प्राथमिकता दी। साथ ही, सभी पक्षों से अपील की गई है कि भविष्य में भूमि आवंटन में न्यायालयीन आदेशों और नियमों का सख्ती से पालन करें।

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