Saturday, 7 Mar 2026

26–27 फरवरी को छत्तीसगढ़ में थम जाएगा पोषण तंत्र, 9 मार्च को रायपुर में विधानसभा का आंबा करेंगी घेराव।

महासमुंद। Integrated Child Development Services (आईसीडीएस)  के 50 वर्ष पूरे होने के बावजूद छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं आज भी न्यूनतम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा के अभाव में काम करने को मजबूर हैं। संयुक्त मंच के आह्वान पर प्रदेश के 50 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में 26 एवं 27 फरवरी को कामबंद हड़ताल कर ताला लगाया जाएगा। इससे महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकांश काम ठप रहने की आशंका है।

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार से सहायिकाओं को मात्र 2250 और कार्यकर्ताओं को 4500 मानदेय मिलता है। न पेंशन, न ग्रेच्युटी, न समूह बीमा, न चिकित्सा अवकाश—ऐसी स्थिति में पारिवारिक दायित्व निभाना बेहद कठिन है। शादी-ब्याह, लंबी बीमारी या परिवार के सदस्य की देखभाल जैसे कारणों से अवकाश लेने पर मानदेय कटौती का आरोप भी लगाया गया है।

छत्तीसगढ़ सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुधा रात्रे और जिला अध्यक्ष सुलेखा शर्मा ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कर्मियों से केवल महिला एवं बाल विकास विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के भी कार्य लिए जा रहे हैं। विभिन्न सभाओं में भीड़ जुटाने तक के लिए बुलाया जाता है। “जब काम लेना होता है तो हमें शासकीय कर्मचारियों से अधिक जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन अधिकार और सुरक्षा शून्य है,” पदाधिकारियों ने कहा। मानदेय कटौती, सेवा समाप्ति की धमकी और विभागीय समर्थन के अभाव का भी आरोप लगाया गया है।

संघ का दावा है कि वर्ष 2023 में आंदोलन का नेतृत्व करने वाली प्रांतीय सचिव सुमन यादव (रामकुंड, रायपुर) को कथित रूप से कूट रचित आरोपों में सेवा से पृथक किया गया। अपील में राहत मिलने के बावजूद बहाली लंबित है। इसी तरह पदाधिकारी कल्पना चंद की बर्खास्तगी का मामला भी अपील में लंबित बताया गया है। इन घटनाओं को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश व्याप्त है।

आंदोलन दो चरणों में किया जाना है। 

संघ के संस्थापक ने बताया कि 12 फरवरी 2026 को सरकार को ज्ञापन देकर मांगों से अवगत कराया जा चुका है। पहला चरण में 26–27 फरवरी को सभी 33 जिला मुख्यालयों में कामबंद हड़ताल, धरना-रैली व प्रदर्शन और कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।

दूसरा चरण में 9 मार्च को राजधानी रायपुर में विशाल प्रांतीय धरनाऔर विधानसभा घेराव का ऐलान किया गया है। छत्तीसगढ़ सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुधा रात्रे और जिला अध्यक्ष सुलेखा शर्मा ने सभी कार्यकर्ता-सहायिकाओं से एकजुटता की अपील की है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें है। मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, पेंशन, ग्रेच्युटी व समूह बीमा की सुविधा, चिकित्सा एवं विशेष अवकाश का प्रावधान, बर्खास्त कर्मियों की बहाली, कार्यभार सीमित कर स्पष्ट दायित्व निर्धारण। आगामी दो दिनों की हड़ताल से प्रदेश में पोषण, टीकाकरण और अन्य बाल विकास सेवाओं पर असर पड़ सकता है। अब नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है।

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