छत्तीसगढ़ में विकास के बड़े-बड़े दावे ज़मीनी स्तर पर खोखले हुए साबित
महासमुंद। जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत भुवनेश्वरपुर गांव में बीते 9 दिनों से बिजली पूरी तरह गुल है।
ट्रांसफार्मर खराब पड़ा है, लेकिन विद्युत विभाग के अधिकारी अब तक आंख मूंदे बैठे हैं।
छात्र-छात्राएं मोमबत्ती के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं, मच्छरों के कारण ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं, और सबसे बड़ी बात – पानी तक मयस्सर नहीं हो रहा। बिजली न होने से हैंडपंप व मोटर चालू नहीं हो रहे, जिससे ग्रामीण एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
विद्युत विभाग का गैर-जिम्मेदार रवैया: ग्रामीणों ने जब पिरदा विद्युत विभाग को बार-बार शिकायत की, तो जूनियर इंजीनियर (JE) का जवाब बेहद चौंकाने वाला था । “हमारे अंडर बहुत गांव आते हैं, हम क्या एक गांव के लिए बैठे हैं?”
ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान साफ इशारा करते हैं कि ग्रामीण समस्याएं अधिकारियों की प्राथमिकता में नहीं हैं।
उद्धवलाल चौहान – ग्रामीण
“9 दिन हो गए, ना कोई अधिकारी आया, ना नया ट्रांसफार्मर लगा। रात में अंधेरा, दिन में पानी नहीं। हम कैसे जिएं?”
बसंत यादव – ग्रामीण
“हम रोज़ शिकायत करते हैं, मगर कोई सुनता नहीं। अधिकारी फोन भी नहीं उठाते। बिजली नहीं तो पानी भी नहीं मिल रहा।”
आरती चौहान – छात्रा
“हम पढ़ाई कैसे करें? रात में मच्छर बहुत काटते हैं। गर्मी में पंखा तक नहीं चलता, बहुत तकलीफ है।”
प्रशासन से 3 सीधे सवाल:
1.क्या 9 दिन से बिजली गुल रहना सामान्य बात है?
2.जब ग्रामीण पीने के पानी और बच्चों की पढ़ाई के लिए परेशान हैं, तो विभाग क्या कर रहा है?
3 JE श्री दीवान का गैर-जिम्मेदार बयान क्या सरकारी संवेदनशीलता को दर्शाता है?
भुवनेश्वरपुर जैसे गांव में बिजली बहाल करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
हम शासन-प्रशासन से आग्रह करते हैं कि जल्द से जल्द नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए और गांव को रोशनी और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जाएं।


