सिटी कोतवाली के नाम से फोन कर आरोपी को गिरफ्तार करने के बदले मांगी रकम, कथित एसआई की डीपी लगाकर महिला को दी जेल भेजने की धमकी
महासमुंद। अपराध दर्ज कराने और गिरफ्तारी की कार्रवाई के नाम पर अब पुलिस की पहचान का दुरुपयोग कर आम लोगों को डराने और ऑनलाइन रकम ऐंठने की कोशिश की जा रही है। महासमुंद के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक महिला और उसके बेटे को कथित पुलिसकर्मी ने फोन कर 10 हजार रुपये की मांग की। रकम नहीं देने पर दोनों को जेल भेजने की धमकी भी दी गई। मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक तक पहुंच गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर को ग्राम साराडीह में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। मामला सिटी कोतवाली पहुंचने पर पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर काउंटर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। इसी बीच टिकेश्वर चेलक के मोबाइल पर 9794644859 नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सिटी कोतवाली का पुलिसकर्मी बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों पर समान धाराएं लगी हैं और दोनों को जेल भेजना पड़ेगा।
आरोप है कि फोन करने वाले ने दूसरे पक्ष के खिलाफ कार्रवाई कराने और टिकेश्वर को राहत दिलाने के एवज में 10 हजार रुपये ऑनलाइन भेजने की मांग की। रकम नहीं देने पर मां-बेटे को जेल भेजने की धमकी दी गई। बेटे से जानकारी मिलने पर उसकी मां श्रीमती चेलक ने उक्त नंबर पर संपर्क किया। मोबाइल नंबर ट्रूकॉलर पर एसआई अभिषेक शर्मा के नाम से प्रदर्शित हो रहा था, जबकि व्हाट्सएप पर पुलिसकर्मी की तस्वीर लगी हुई थी। बातचीत के दौरान कथित पुलिसकर्मी ने महिला से नाम और कामकाज की जानकारी लेते हुए दोबारा रकम की मांग की।
महिला ने पहले रकम देने की सहमति जताई, लेकिन संदेह होने पर बातचीत रिकॉर्ड कर ली और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत करने की बात कहकर फोन काट दिया। बाद में परिचितों से चर्चा करने पर पता चला कि सिटी कोतवाली में इस नाम का कोई पुलिसकर्मी नहीं है और न ही थाने से इस तरह का फोन किया गया था। महिला ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी है। अब यह जांच का विषय है कि पुलिस अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फोन करने वाला व्यक्ति कौन है और उसके पीछे कौन सक्रिय है।
पुलिस की छवि का दुरुपयोग, साइबर ठगी का नया तरीका?
यह घटना केवल 10 हजार रुपये की कथित ठगी की कोशिश नहीं, बल्कि पुलिस के नाम पर आम नागरिकों को भयभीत कर अवैध वसूली करने के प्रयास की ओर भी संकेत करती है। एक ओर पुलिस साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में ठगों की पहचान और उन तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सवाल यह भी है कि यदि कोई आम नागरिक पुलिस की वर्दी, पद और नाम पर भरोसा कर रकम दे दे, तो उसकी जवाबदेही कौन लेगा? पुलिस के नाम पर धमकी देकर पैसे मांगने वाले ऐसे तत्वों पर त्वरित कार्रवाई और उनकी पहचान सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि कानून के रक्षक की पहचान का इस्तेमाल कर कोई कानून को ही सौदेबाजी का माध्यम न बना सके।
नोट: फोन करने वाले की वास्तविक पहचान और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


