संवाददाता बालाराम कोलते
भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 8 करोड़ रुपये की लागत से चमकाए गए नए डिस्प्ले बोर्ड ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बोर्ड पर स्टेशन के ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है, जबकि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के स्टेशन पर उतरने जैसे महत्वपूर्ण पलों का कोई जिक्र ही नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेताओं ने इसे ‘इतिहास के साथ छेड़छाड़’ करार देते हुए रेलवे प्रशासन पर निशाना साधा है। पार्टी ने तत्काल सुधार की मांग की है, अन्यथा उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
स्टेशन का गौरवशाली इतिहास: औद्योगिक क्रांति का गवाह
भिलाई नगर रेलवे स्टेशन (कोड: BQR) छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण जंक्शन है, जो हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर पड़ता है। इसका इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा है, जब 1890-91 में बंगाल नागपुर रेलवे (BNR) के तहत नागपुर-आसनसोल लाइन बिछाई गई। यह स्टेशन भिलाई इस्पात संयंत्र (Bhilai Steel Plant) के निकट होने के कारण औद्योगिक महत्व का केंद्र बना। सोवियत संघ की सहायता से स्थापित यह संयंत्र भारत का पहला और सबसे बड़ा इस्पात उत्पादन इकाई था, जिसने देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत किया।
स्टेशन का स्वर्णिम अध्याय 1950 के दशक से जुड़ा है। 4 फरवरी 1959 को संयंत्र के पहले ब्लास्ट फर्नेस का उद्घाटन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया, जो भिलाई नगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर उतरकर ही वहां पहुंचे थे। यह घटना बीएसपी के अभिलेखागार में तस्वीरों और दस्तावेजों के रूप में संरक्षित है। इसी तरह, पंडित नेहरू ने 1955 में संयंत्र की नींव रखी और कई बार स्टेशन का दौरा किया, जहां से वे औद्योगिक विकास की प्रगति का जायजा लेते थे। नेहरू का भिलाई से गहरा लगाव था—उन्होंने इसे ‘भारत की स्टील हृदय’ कहा था। ये ऐतिहासिक यात्राएं न केवल स्टेशन की पहचान हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास का अभिन्न हिस्सा हैं। स्टेशन पर आज भी 33 से अधिक ट्रेनें रुकती हैं, जो लाखों यात्रियों को जोड़ती हैं।
डिस्प्ले बोर्ड पर गंभीर लापरवाही: तथ्य गायब, गलतियां साफ
अमृत भारत योजना के तहत नवीनीकृत स्टेशन पर लगाए गए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड में स्टेशन के विकास की तारीखें तो दी गई हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को जानबूझकर या लापरवाही से हटा दिया गया है। नेहरू की 1955 यात्रा और राजेंद्र प्रसाद का 1959 उद्घाटन—ये दोनों पल बोर्ड पर अनुपस्थित हैं। ऊपर से, बोर्ड पर लिखे कुछ तथ्य भी गलत पाए गए हैं, जैसे स्टेशन के निर्माण वर्ष और प्रमुख घटनाओं की तिथियां। स्थानीय यात्रियों और इतिहास प्रेमियों ने इसे ‘इतिहास का अपमान’ बताया है।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक यूजर ने रेल मंत्री को टैग करते हुए लिखा, “भिलाई नगर स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड ने नेहरू और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं के ऐतिहासिक तथ्यों को मिटा दिया है। यह गलती नहीं, बल्कि इतिहास की विकृति है। रेलवे को तुरंत सुधारना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।”
कांग्रेस का आक्रोश: ‘इतिहास छुपाना साजिश, सुधार न हुआ तो आंदोलन’
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “यह लापरवाही नहीं, बल्कि इतिहास के साथ साजिश है। नेहरू-राजेंद्र प्रसाद जैसे शख्सियतों को भुलाना छत्तीसगढ़ के गौरव को ठेस पहुंचाता है। रेलवे को बोर्ड सुधारना होगा, वरना हम सड़क पर उतरेंगे।” पार्टी के अन्य नेताओं ने इसे ‘राजनीतिक पूर्वाग्रह’ का नतीजा बताया और रेलवे से 48 घंटे में जवाब मांगा है। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता स्टेशन पर धरना देने की तैयारी में हैं।
रेलवे की चुप्पी, जनता का गुस्सा
रेलवे प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन स्रोतों के अनुसार, डिस्प्ले बोर्ड तैयार करने वाली एजेंसी पर लापरवाही का आरोप है। यात्रियों का कहना है कि स्टेशन का नया लुक तो आकर्षक है, लेकिन इतिहास को नजरअंदाज करना अस्वीकार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमृत भारत योजना में ऐतिहासिक सटीकता पर जोर दिया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां सही तथ्यों से जुड़ सकें।
यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां औद्योगिक विरासत हमेशा चुनावी मुद्दा बनती रही है। रेलवे अगर शीघ्र सुधार नहीं करता, तो मामला और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, भिलाई के यात्री स्टेशन के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए सुधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


