रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ा कदम उठाया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ आठवां पूरक अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। अब तक इस मामले में मूल चार्जशीट सहित कुल आठ अभियोग पत्र अदालत में पेश किए जा चुके हैं।
चार्जशीट में चैतन्य बघेल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच के अनुसार, उन्होंने आबकारी विभाग में अवैध वसूली के लिए एक संगठित सिंडिकेट खड़ा किया और उसके संचालन में प्रमुख भूमिका निभाई। वे प्रशासनिक अधिकारियों जैसे अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी और निरंजन दास तथा जमीनी स्तर के लोगों जैसे अनवर ढेबर, अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल के बीच समन्वय स्थापित करते थे। सिंडिकेट को उच्चस्तरीय संरक्षण प्रदान करने के साथ-साथ नीतिगत और प्रशासनिक हस्तक्षेप के जरिए घोटाले को लंबे समय तक चलाने में उनकी भूमिका पाई गई है।
**200-250 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत लाभ**
जांच में खुलासा हुआ है कि चैतन्य बघेल ने घोटाले की अवैध कमाई में से लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये अपने हिस्से में प्राप्त किए। अनवर ढेबर की टीम द्वारा एकत्रित रकम को वे अपने विश्वसनीय लोगों के माध्यम से उच्च स्तर तक पहुंचाते थे। इसके अलावा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन की विभिन्न फर्मों से बैंकिंग चैनल के जरिए रकम प्राप्त कर उसे अपनी पारिवारिक फर्मों और निर्माणाधीन रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश किया। पारिवारिक मित्रों और सहयोगियों के जरिए भी बड़ी राशि प्राप्त कर निवेश करने के सबूत मिले हैं।
चार्जशीट में गिरफ्तार आरोपियों की वर्तमान स्थिति, डिजिटल साक्ष्यों की रिपोर्ट और चल रही जांच वाले आरोपियों की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। प्रकरण की जांच निरंतर जारी है।
**घोटाले का आकार 3500 करोड़ से अधिक**
अब तक की जांच में घोटाले की रकम लगभग 3074 करोड़ रुपये आंकी गई है, लेकिन आगे की जांच से यह 3500 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना जताई गई है। यह घोटाला मुख्य रूप से 2019-2023 के दौरान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ, जिसमें अवैध शराब बिक्री, फर्जी होलोग्राम और ओवररेटिंग जैसी अनियमितताओं के आरोप हैं।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी समानांतर जांच कर रहा है और पहले चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर चुका है। ईडी ने भी उनके खिलाफ समान आरोप लगाते हुए बड़ी राशि के मनी लॉन्ड्रिंग का दावा किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य और बयानों से सिंडिकेट की पूरी संरचना उजागर हो रही है। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


