Saturday, 7 Mar 2026

तमनार में कोयला खदान विरोधी आंदोलन हिंसक: पुलिस-ग्रामीणों में झड़प, टीआई कमला पुसाम सहित कई घायल, वाहनों में आगजनी

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के विरोध में चल रहा ग्रामीणों का शांतिपूर्ण धरना शनिवार को अचानक हिंसक हो गया। लिबरा गांव के सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) चौक पर पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों को हटाने पहुंची पुलिस पर उग्र भीड़ ने पथराव कर दिया। इस झड़प में तमनार थाना प्रभारी निरीक्षक कमला पुसाम गंभीर रूप से घायल हो गईं। महिलाओं की भीड़ ने उन पर लात-घूंसे बरसाए। एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा सहित कम से कम 8 पुलिसकर्मी और कई ग्रामीण भी चोटिल हुए।

सूत्रों के अनुसार, सुबह पुलिस धरना हटाने पहुंची तो पहले समझाइश हुई, लेकिन दोपहर ढाई बजे के करीब भीड़ बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने बैरियर तोड़े, लाठी-डंडों से हमला किया और पथराव शुरू कर दिया। गुस्साई भीड़ ने पुलिस की बस, जीप, एक कार और एंबुलेंस सहित कई वाहनों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। जिंदल कंपनी के कोल हैंडलिंग प्लांट में घुसकर कन्वेयर बेल्ट और उपकरणों को नुकसान पहुंचाया गया। एक रोड एक्सीडेंट में ग्रामीण के घायल होने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया, जिसके बाद विवाद और भड़क गया।

दोनों पक्षों के दावे
ग्रामीणों का पक्ष: 14 प्रभावित गांवों के लोग 8 दिसंबर को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई को “फर्जी” और नियमविरुद्ध बता रहे हैं। उनका कहना है कि ग्राम सभा की सहमति के बिना सुनवाई हुई। परियोजना से उनकी जमीन, जंगल, पानी और आजीविका प्रभावित होगी, साथ ही बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। वे शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, लेकिन पुलिस ने जबरन हटाने की कोशिश की।

प्रशासन का पक्ष: कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि धरना सड़क जाम कर रहा था, इसलिए हटाया जा रहा था। कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाया। समझाइश के बावजूद पथराव हुआ। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंचे। कई ग्रामीणों को हिरासत में लिया गया है। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। तनाव बना हुआ है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

यह घटना छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों को लेकर बढ़ते विवादों की एक और कड़ी है। सरगुजा और अन्य जिलों में भी इसी तरह के विरोध देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास और पर्यावरण-आजीविका के बीच संवाद की कमी से ऐसे टकराव बढ़ रहे हैं। प्रशासन से उम्मीद है कि बातचीत से स्थायी समाधान निकाला जाए।

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