रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से प्रतिभाओं की जननी रही है, और अब रायपुर की एक नन्हीं परी ने अपने नृत्य से पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल की होनहार छात्रा पीहू आव्या जैन ने उड़ीसा के जगन्नाथपुरी में आयोजित “इंटरनेशनल डांस कॉम्पिटिशन” में प्रथम स्थान प्राप्त कर रायपुर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर दिया है।
पीहू की नृत्य प्रस्तुति इतनी मनमोहक रही कि मंच पर मौजूद निर्णायक भी उनकी अदाओं और ताल की लय में झूम उठे।
उनका परफ़ॉर्मेंस खत्म होते ही तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा ऑडिटोरियम गूंज उठा। यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस नन्हीं डांसर ने इतिहास रचा हो। इससे पहले भी पीहू ने दिल्ली, मुंबई, जयपुर, भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की डांस प्रतियोगिताओं में अनेक ट्रॉफियाँ और अवॉर्ड अपने नाम किए हैं।

पीहू आव्या जैन बचपन से ही नृत्य की दीवानी रही हैं। उनकी लगन को देखकर उनकी माता श्रीमती अंजू जैन ने उन्हें कत्थक नृत्य की विधिवत शिक्षा दिलानी शुरू की। आज यही साधना, यही निरंतर अभ्यास, पीहू को इंटरनेशनल स्तर तक ले आया है। पढ़ाई और नृत्य दोनों में संतुलन बनाकर चलने वाली यह बालिका वर्तमान में कक्षा 8 वीं की छात्रा है और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी हमेशा अव्वल स्थान पर रहती है।

स्कूल प्रबंधन ने भी पीहू की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा —“पीहू हमारे संस्थान की शान हैं। उनकी मेहनत और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं।” पीहू का सपना है कि वह भविष्य में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और ऊँचाइयों तक पहुँचाए।
वह कहती हैं — “डांस मेरे लिए सिर्फ कला नहीं, बल्कि साधना है। जब मैं नाचती हूँ, तो मुझे लगता है जैसे मैं ईश्वर के सबसे करीब हूँ।” रायपुर और पूरा छत्तीसगढ़ इस नन्हीं नृत्यांगना की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। पीहू ने साबित कर दिया कि अगर लगन सच्ची हो तो उम्र छोटी नहीं, हौसले बड़े मायने रखते हैं।
अव्या जैन की नृत्य प्रस्तुति इतनी मनमोहक रही कि मंच पर मौजूद निर्णायक भी उनकी अदाओं और ताल की लय में झूम उठे।
जैसे ही उनका परफ़ॉर्मेंस समाप्त हुआ, पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह कोई पहला अवसर नहीं है जब इस नन्हीं डांसर ने इतिहास रचा हो। इससे पहले भी अव्या ने दिल्ली, मुंबई, जयपुर और भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अनेक ट्रॉफियाँ और अवॉर्ड अपने नाम किए हैं।
गुरु के सानिध्य में जन्मी कला की चमक
पीहू आव्या जैन का नृत्य सफर बेहद कम उम्र से शुरू हुआ। सिर्फ तीन साल की उम्र में, उनके माता-पिता ने उनके भीतर छिपी कला को पहचान लिया और उन्हें डॉ. स्वप्निल कर्माहे के सानिध्य में पंडित दीनदयाल नगर स्थित कृष्ण कला केंद्र में कत्थक नृत्य की शिक्षा के लिए भेजा। बहुत ही कम समय में अव्या ने अपने गुरु का दिल जीत लिया। उनकी लय, भाव-भंगिमा और अभिव्यक्ति ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।
डॉ. कर्माहे के मार्गदर्शन में अव्या ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आयोजित अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में अपनी कला का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। गुरु-शिष्य की यह जोड़ी आज भी एक मिसाल है, जहाँ समर्पण, साधना और अनुशासन ने मिलकर एक नन्हीं प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
सफलता के पीछे लगन और अनुशासन की कहानी बचपन से ही नृत्य की दीवानी अव्या जैन की प्रतिभा को देखकर उनकी माता श्रीमती अंजू जैन ने उन्हें कत्थक की विधिवत शिक्षा दिलाई। आज वही लगन और निरंतर अभ्यास उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा चुका है।
पढ़ाई और नृत्य — दोनों में संतुलन बनाकर चलने वाली यह बालिका वर्तमान में कक्षा 8वीं की छात्रा है और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी हमेशा अव्वल रहती है। संस्थान और परिवार का गर्व ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधन ने अव्या की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा “पीहू हमारे संस्थान की शान हैं। उनकी मेहनत और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं।”
‘डांस मेरे लिए साधना है’ पीहू अव्या जैन
अव्या कहती हैं “डांस मेरे लिए सिर्फ कला नहीं, बल्कि साधना है। जब मैं नाचती हूँ, तो मुझे लगता है जैसे मैं ईश्वर के सबसे करीब हूँ।” रायपुर और पूरा छत्तीसगढ़ इस नन्हीं नृत्यांगना की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। पीहू ने साबित कर दिया कि अगर लगन सच्ची हो, तो उम्र छोटी नहीं हौसले बड़े मायने रखते हैं।




