रायपुर। छत्तीसगढ़ सर्व रविदास समाज ने प्रदेश शासन से आग्रह किया है कि नवनिर्मित छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन का नाम संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के नाम पर रखा जाए। समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. के.एल. टांडेकर ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि यह निर्णय प्रदेश के लाखों अनुयायियों की भावनाओं का सम्मान होगा और सामाजिक समरसता की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
डॉ. टांडेकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित विधानसभा भवन का उद्घाटन हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से संपन्न हुआ, जो समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। प्रदेश सरकार द्वारा अब तक विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और महापुरुषों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण प्रदर्शित किया गया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यदि यह भवन संत रविदास जी के नाम पर रखा जाता है, तो यह सामाजिक न्याय और समानता की भावना को नई ऊंचाई देगा।
उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी केवल एक संत नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के प्रणेता और मानवीय मूल्यों के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने समाज में ऊँच-नीच और भेदभाव को मिटाने का जो संदेश दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। गुरु रविदास जी के उपदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” ने हर व्यक्ति को आत्मशुद्धि और समता का मार्ग दिखाया।
डॉ. टांडेकर ने आगे कहा कि यदि विधानसभा भवन का नाम संत रविदास जी के नाम पर रखा जाता है तो यह निर्णय केवल किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात होगी। इससे “सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास” की भावना को और मजबूती मिलेगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, महामहिम राज्यपाल तथा राज्य के समस्त मंत्रिगण से निवेदन किया है कि वे प्रदेश की जनता और संत रविदास जी के करोड़ों अनुयायियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए विधानसभा भवन का नामकरण संत शिरोमणि गुरु रविदास विधानसभा भवन के रूप में करने पर विचार करें।
उन्होंने कहा कि “संत रविदास जी के मानवीय विचार और सिद्धांत समाज को एकता, समानता और भाईचारे के सूत्र में बाँधते हैं। अगर प्रदेश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था उनके नाम से जुड़ती है, तो यह भारत की सामाजिक न्याय की परंपरा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बनेगा।”


