पिथौरा। ग्राम किशनपुर इन दिनों आपसी खींचतान के चलते चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पंचायत में सचिव को लेकर सरपंच और उपसरपंच आमने-सामने हैं। एक ओर उपसरपंच ने सचिव पुनीत सिन्हा पर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर महिला सरपंच और कई ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपकर सचिव को स्थायी रूप से ग्राम में पदस्थ करने की मांग की है।
मामला इतना गंभीर हो गया है कि पंचायत में दो गुट बन गए हैं। एक तरफ उपसरपंच और समर्थक, दूसरी तरफ सरपंच और ग्रामीण सचिव के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। जिला प्रशासन अब तक इस विवाद पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाया है।
सचिव पुनीत सिन्हा का पक्ष
सचिव पुनीत सिन्हा ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि वे पिछले साढ़े तीन वर्षों से किशनपुर में पदस्थ हैं और लगभग 30 वर्षों का सचिवीय अनुभव रखते हैं। ग्राम पंचायत के कार्यों में वे केवल मार्गदर्शन करते हैं, जबकि कार्य एजेंसी स्वयं सरपंच होती है।
उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक कार्य का स्टीमेट, कार्यादेश, उपयंत्री द्वारा मूल्यांकन और सत्यापन के बाद ही भुगतान ऑनलाइन किया जाता है। ऐसे में आर्थिक अनियमितता के आरोप निराधार हैं।
सिन्हा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उपसरपंच प्रत्येक कार्य के एवज में 5% राशि की मांग करते हैं, और नहीं देने पर उनके खिलाफ शिकायतें करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों ने उन्हें स्थायी सचिव के रूप में रखने का प्रस्ताव पारित किया है और लगभग 200 ग्रामीणों के हस्ताक्षर सहित ज्ञापन जिला व जनपद पंचायत को सौंपा गया है।
सिन्हा ने साफ कहा कि यदि उपसरपंच उनके विरुद्ध एक भी गलती साबित कर दें तो वे स्वयं पद छोड़ने को तैयार हैं।
ग्रामीणों में खींचतान
ग्राम किशनपुर की इस खींचतान ने पंचायत को दो खेमों में बांट दिया है। प्रशासन की चुप्पी से असमंजस की स्थिति और गहराती जा रही है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस विवाद में किसका पक्ष भारी पड़ता है और पंचायत की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से कब तक बहाल होती है।


