महासमुंद। शांत्रीबाई कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की प्रथम बैठक प्राचार्य एवं समिति अध्यक्ष डॉ. सविता चंद्राकर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में शिक्षण समिति, उद्योग क्षेत्र, तकनीकी, संकाय और छात्र प्रतिनिधियों सहित समस्त सदस्यों ने सहभागिता की। बैठक का शुभारंभ औपचारिक स्वागत से हुआ। प्राचार्य डॉ. चंद्राकर ने शिक्षण समिति के अध्यक्ष राहुल चंद्राकर, उपाध्यक्ष द्रोण चंद्राकर, स्थानीय समाज प्रतिनिधि चंद्रपाल चंद्राकर, सचिव कमलेश चंद्राकर, औद्योगिक अधिकारी प्रमोद चंद्राकर, तकनीकी अधिकारी संजय चंद्राकर सहित उपस्थित सभी सदस्यों का स्वागत किया। नैक संयोजक एवं सहायक प्राध्यापक शत्रुघ्न पटेल ने एनएएसी के 10 मापदंडों पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए संस्थागत अनुपालन की जानकारी दी। आईक्यूएसी संयोजक अर्शिन सालोमन द्वारा सत्र 2025–26 की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। पिछली शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट में बताया गया कि सत्र 2024–25 में महाविद्यालय का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा, जो संस्थान की शिक्षा गुणवत्ता का प्रमुख संकेतक है।
प्रवेश, प्रशिक्षण और कौशल विकास पर विशेष फोकस
बैठक में आगामी सत्र 2026–27 में नए विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से प्रचार–प्रसार अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। साथ ही मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती निर्माण एवं अन्य कौशल–आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सत्र में शामिल करने पर सहमति बनी। औद्योगिक अधिकारी प्रमोद चंद्राकर ने उद्योग–महाविद्यालय सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया।
शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नवाचार कार्यक्रमों की समीक्षा
बैठक में मिलेट्स डे, राष्ट्रीय बालिका दिवस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, साइबर सुरक्षा एवं एआई कार्यशाला, महिला सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, नशा मुक्ति अभियान, वैश्विक कौशल विकास वेबिनार, विकसित भारत कार्यक्रम, वंदे मातरम कार्यक्रम तथा यातायात नियम जागरूकता अभियान सहित विभिन्न कार्यक्रमों की चर्चा की गई और उनकी सफलता सराही गई।
‘उपी परियोजना’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधारित पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय
आईक्यूएसी ने ‘उपी परियोजना’ (पानी, पर्यावरण एवं प्लास्टिक) को महाविद्यालय परिसर में लागू करने का प्रस्ताव पारित किया। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप वैल्यू एडेड कोर्स, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट एवं परीक्षाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर निर्णय लिया गया। प्रत्येक विभाग को नवाचारपूर्ण शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के निर्देश दिए गए ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
हरित, स्वच्छ परिसर और अनुसंधान को बढ़ाव
महाविद्यालय परिसर को हरित, स्वच्छ, सौंदर्यपूर्ण और पर्यावरण–अनुकूल बनाने पर सभी सदस्य सहमत हुए। विभागों को अनुसंधान कार्य, शोध–पत्र एवं परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रोत्साहित किया गया।
उद्योग–प्रशासनिक सहयोग के लिए एमओयू प्रस्तावित
बैठक में निर्णय लिया गया कि महाविद्यालय आगामी सत्र में विभिन्न उद्योगों, प्रशासनिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के साथ एमओयू करेगा, ताकि विद्यार्थियों को रोजगार–उन्मुख कौशल एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके। विशेष रूप से टेक्सटाइल, ईंट उद्योग, खाद्य उद्योग एवं अन्य स्थानीय उद्योगों से सहयोग स्थापित करने की योजना बनाई गई।
खेल, करियर मार्गदर्शन और विद्यार्थी सुविधाओं पर भी जोर
बैठक में अंतर–महाविद्यालयीन खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। करियर मार्गदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावसायिक दिशा प्रदान करने और कैंपस में कैंटीन की सुविधा उपलब्ध कराने पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।बैठक का समापन प्राचार्य डॉ. सविता चंद्राकर के धन्यवाद ज्ञापन और नैक संयोजक शत्रुघ्न पटेल के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। प्राचार्य ने सभी सदस्यों से महाविद्यालय की गुणवत्ता उन्नयन, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से कार्य करने का आह्वान किया।


