Friday, 12 Jun 2026

आस्था या अंधविश्वास? ‘चावल वाले बाबा’ की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

महासमुंद। धर्म, आस्था और विश्वास के नाम पर लोगों के जीवन में गहरी पैठ बना चुके कथित ‘चावल और गुलाब वाले बाबा’ नरेंद्र नयन शास्त्री की गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है। एक महिला द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोप के बाद महासमुंद पुलिस की कार्रवाई ने न केवल एक हाई-प्रोफाइल मामले को उजागर किया है, बल्कि समाज में अंधविश्वास और तथाकथित चमत्कारों के प्रति लोगों की सोच पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, एक महिला ने बागबाहरा थाना पहुंचकर आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में उसके साथ दैहिक शोषण हुआ था। सामाजिक संकोच, लोकलाज और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह लंबे समय तक शिकायत दर्ज नहीं करा सकी।आखिरकार उसने साहस जुटाया और न्याय की उम्मीद लेकर पुलिस के पास पहुंची।

महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए महासमुंद पुलिस ने तत्काल जांच प्रारंभ की। पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देशन में मामले की पड़ताल की गई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री के विरुद्ध अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 376(2)(j), 376(2)(n) एवं 376(2)(m) के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू की है।

नरेंद्र नयन शास्त्री प्रदेश में अपने धार्मिक आयोजनों और भविष्यवाणियों के दावों के कारण चर्चित रहे हैं। उनके दरबार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे और कई प्रभावशाली व्यक्तियों के उनसे जुड़े होने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक भविष्यवाणियां करते दिखाई देते हैं।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष उस महिला का साहस है जिसने वर्षों बाद भी न्याय के लिए आवाज उठाई। वहीं महासमुंद पुलिस की तत्परता भी उल्लेखनीय रही, जिसने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बिना किसी दबाव की परवाह किए कानूनी कार्रवाई की।

यह मामला समाज के लिए भी एक सीख है। किसी भी व्यक्ति को केवल चमत्कार, भविष्यवाणी या धार्मिक आडंबर के आधार पर आंख मूंदकर स्वीकार करना उचित नहीं है। आस्था व्यक्तिगत विषय है, लेकिन कानून और विवेक उससे ऊपर हैं। लोगों को चाहिए कि वे किसी भी व्यक्ति के दावों को तर्क और तथ्य की कसौटी पर परखें तथा किसी प्रकार के शोषण, दबाव या अन्याय की स्थिति में बिना भय के कानून की शरण लें। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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