Wednesday, 24 Jun 2026

घोड़ारी पंचायत में हिसाब-किताब को लेकर हंगामा, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामसभा में विकास कार्यों की राशि का ब्योरा मांगने पर सरपंच-सचिव पर जवाब से बचने का आरोप, जांच की मांग तेज

महासमुंद। शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत घोड़ारी में आयोजित ग्रामसभा उस समय हंगामे में बदल गई, जब ग्रामीणों ने पंचायत के कामकाज और विकास कार्यों में खर्च की गई राशि का हिसाब मांग लिया। ग्रामीणों ने पंचायत में लंबे समय से चल रही कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किए और लाखों रुपये की शासकीय राशि के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत घोड़ारी को विकास कार्यों के लिए शासन से मिलने वाली राशि का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा है। ग्रामसभा में पहुंचे ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव से पंचायत को प्राप्त राशि, किए गए निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी और अन्य खर्चों का लेखा-जोखा मांगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने पंचायत की आय और खर्च का हिसाब जानना चाहा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत क्षेत्र में संचालित रेत घाट से मिलने वाली राशि और ग्राम पंचायत के बाजार से प्राप्त होने वाली आय को लेकर भी कई सवाल हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इन स्रोतों से आने वाली राशि का कोई स्पष्ट हिसाब पंचायत द्वारा नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की कि पंचायत की सभी आय और खर्च की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

ग्रामसभा के दौरान ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बहस की स्थिति बन गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सवालों का जवाब देने के बजाय सरपंच और सचिव सभा को बीच में छोड़कर चले गए। ग्रामीणों ने इसे जवाबदेही से बचने का प्रयास बताते हुए नाराजगी जताई।

ग्रामीणों ने पंचायत संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत की निर्वाचित महिला सरपंच होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण कार्यों और निर्णयों में सरपंच पति की भूमिका सामने आती है। ग्रामीणों ने सवाल किया कि पंचायत के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में किसकी जिम्मेदारी है और निर्णय प्रक्रिया किस नियम के तहत संचालित हो रही है।

ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, जहां जनता के पैसे का उपयोग गांव के विकास के लिए होना चाहिए। यदि विकास कार्यों की राशि का सही उपयोग नहीं हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत के पिछले वर्षों के सभी कार्यों, भुगतान और आय-व्यय की जांच कराई जाए और यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। वहीं पूरे मामले को लेकर अब प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिक गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल अपने गांव के विकास और सरकारी राशि की पारदर्शिता चाहते हैं। उनका कहना है कि पंचायत में जनता के सवालों का जवाब मिलना चाहिए, ताकि ग्रामीणों का विश्वास व्यवस्था पर बना रहे।

अब देखने वाली बात होगी कि ग्रामीणों के आरोपों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या घोड़ारी पंचायत के कार्यों की जांच कराई जाती है या नहीं। फिलहाल पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।

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