Saturday, 7 Mar 2026

विद्यार्थियों ने किया औषधीय पौधों का शानदार संग्रह, नई शिक्षा नीति के तहत अभिनव पहल 

महासमुंद। शांत्रीबाई कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय महासमुंद (छत्तीसगढ़) के बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के अंतर्गत जेनेरिक इलेक्टिव कोर्स (वनस्पतिशास्त्र) में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल करते हुए विशेष औषधीय पौधों का संग्रहण एवं अध्ययन कार्य किया है।

इस शैक्षणिक गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों को वनस्पतिशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक लुकेश साहू एवं अर्शिन सालोमन द्वारा नासा (NASA) से प्रमाणित औषधीय पौधों की जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यार्थियों ने इन पौधों का संग्रहण कर उनके औषधीय गुण, वैज्ञानिक उपयोग एवं पर्यावरणीय महत्व पर गहन अध्ययन किया।

छात्रों द्वारा संग्रहित प्रमुख औषधीय पौधे_

1. स्नेक प्लांट (Snake Plant) – हवा को शुद्ध करने वाला पौधा, जो बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड और जाइलीन जैसे विषाक्त तत्वों को हटाता है। यह मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, एलर्जी से राहत देता है और तनाव कम करता है।

2. स्पाइडर प्लांट (Spider Plant) – वातावरण में नमी बनाए रखता है और हवा से कार्बन मोनोऑक्साइड, टोल्यून व फॉर्मोल्डिहाइड जैसे हानिकारक रसायनों को फ़िल्टर करता है।

3. पोथोस प्लांट (Pothos Plant) – प्राकृतिक वायु शोधक के रूप में कार्य करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, एंटीडायबिटिक तथा कैंसर विरोधी गुण पाए जाते हैं।

4. एलोवेरा (Aloe Vera) – जिसे बर्न प्लांट या लिली ऑफ डेज़र्ट के नाम से जाना जाता है। इसकी जेल में विटामिन A, B, C, E, फोलिक एसिड, एमिनो एसिड और सैलिसिलिक एसिड जैसे तत्व होते हैं, जो घाव भरने, त्वचा रोग, मुंह के छाले, शुगर नियंत्रण और पाचन स्वास्थ्य में लाभकारी हैं।

विद्यार्थियों ने इन सभी पौधों से संबंधित विस्तृत जानकारी क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल रूप में एकत्रित की और एक विशेष पुस्तक के रूप में महाविद्यालय ग्रंथालय में सुरक्षित की, जिसमें पौधों का स्थानीय नाम, वैज्ञानिक नाम और औषधीय उपयोग दर्ज है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सविता चंद्राकर ने विद्यार्थियों के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों की जिम्मेदारी दर्शाती है, बल्कि नई शिक्षा नीति के लक्ष्य — ‘सीखना, करना और समाज से जोड़ना’ की भावना को भी साकार करती है।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रोजेक्ट छात्रों में अनुसंधान, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं। यह प्रयास छात्रों के लिए प्रेरणा बनेगा। महासमुंद जिले के लिए गौरव की बात है कि कॉलेज के युवा अब औषधीय विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नवाचार कर रहे हैं।

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