स्वीकृत अभिन्यास में बदलाव और प्रकोष्ठों की संख्या में विसंगति मिली, EWS-LIG गणना भी प्रभावित
बिलासपुर, 10 सितंबर। अज्ञेय नगर स्थित बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं के मामले में नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने मेसर्स अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त कर दी है। भागीदार नमन गोयल के माध्यम से जारी विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत किया गया है।
जांच में सामने आया कि प्रोजेक्ट में जिस भूमि का उपयोग पहुंच मार्ग के रूप में किया जा रहा था, वह पूर्व में स्वीकृत अभिन्यास का हिस्सा थी। जांच समिति के अनुसार, उक्त भूमि को नए विकास में शामिल करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुराने अभिन्यास में संशोधन किया जाना आवश्यक था, जिसका पालन नहीं किया गया।
जांच में दूसरी प्रमुख विसंगति स्वीकृत मानचित्र में प्रकोष्ठों की संख्या को लेकर सामने आई। विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉक, प्रत्येक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के हिसाब से कुल 60 प्रकोष्ठ स्वीकृत थे। वहीं मानचित्र में कुछ स्थानों पर छह तल दर्शाए गए, जिससे प्रकोष्ठों की संख्या 90 तक पहुंचती है। इसका असर EWS और LIG वर्ग के लिए निर्धारित प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ता है।
संस्था ने इसे सलाहकार की लिपिकीय नंबरिंग त्रुटि बताया, लेकिन जांच समिति ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। समिति के अनुसार स्वीकृति से पूर्व अभिन्यास पर आवेदक के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए उसमें दर्ज विवरण की जिम्मेदारी संस्था की भी है।
आदेश से पहले संस्था को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद संचालनालय ने जवाब को असंतोषजनक मानते हुए विकास अनुज्ञा की शर्तों का उल्लंघन पाया और अनुज्ञा निरस्त करने का निर्णय लिया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान आर्किटेक्ट की वैधता, EWS-LIG से संबंधित शपथ-पत्र, पहुंच मार्ग की चौड़ाई, पार्किंग और ओपन स्पेस सहित कुछ अन्य पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, ये बिंदु अंतिम निरस्तीकरण आदेश में स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में दर्ज नहीं हैं। निरस्तीकरण आदेश की प्रतियां आवास एवं पर्यावरण विभाग, बिलासपुर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, CG RERA समेत संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
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