दलित महिला जिला अध्यक्ष के अपमान का मामला उठा, पर्यवेक्षक के सामने फूटा कांग्रेस महामंत्री का गुस्सा
महासमुंद। जिला कांग्रेस भवन में आज वह दृश्य देखने को मिला जिसने जिले की राजनीति को झकझोर कर रख दिया। केंद्रीय कांग्रेस द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक एवं मांडवा विधायक रीटा चौधरी जब संगठन सुदृढ़ीकरण और नए जिला अध्यक्ष चयन के लिए कार्यकर्ताओं की रायशुमारी कर रही थीं। तभी मंच से कांग्रेस के जिला महामंत्री गणेश शर्मा ने भरे मंच और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के सामने ऐसा बयान दे डाला जिसने सबको स्तब्ध कर दिया।
दलित होने की सजा भुगत रही हैं दुर्गा सागर महामंत्री गणेश शर्मा ने कहा, “महिला जिला कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गा सागर के साथ जातिगत दुर्भावना रखी जाती है। उन्हें न तो कभी मंच पर कुर्सी दी जाती है, न कभी सम्मान। यहां तक कि किसी कार्यक्रम में उनका नाम तक नहीं लिया जाता, सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित हैं।” उन्होंने कहा, “जहां राहुल गांधी जी और खड़गे जी देशभर में दलितों को सम्मान और नेतृत्व देने की बात कर रहे हैं, वहीं महासमुंद जिले में एक दलित महिला अध्यक्ष को बार-बार अपमानित किया जा रहा है। जब आंदोलन या धरने में भीड़ की जरूरत होती है, तभी महिला कांग्रेस अध्यक्ष को याद किया जाता है, यह बेहद शर्मनाक है।”
पर्यवेक्षक रीटा चौधरी ने कहा “अगर ऐसा हुआ है तो यह गलत है” गणेश शर्मा की बातों को सुनकर पर्यवेक्षक रीटा चौधरी कुछ देर तक मौन रहीं, फिर उन्होंने कहा “अगर ऐसा हुआ है तो यह गलत है,और मैं इसके लिए व्यक्तिगत रूप से माफी चाहती हूं। रीटा चौधरी ने तत्काल जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गा सागर को मंच पर बुलाया, उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था कराई, और मंच पर फोटो खिंचवाकर एकता का संदेश देने की कोशिश की। लेकिन तब तक कांग्रेस भवन की दीवारों में असंतोष की गूंज फैल चुकी थी। गुटबाजी की आग अब और तेज़। यह कोई पहला मौका नहीं जब महासमुंद कांग्रेस की अंदरूनी कलह सतह पर आई हो। पिछले विधानसभा चुनाव में भी जिले की दोनो सीटों, बसना और महासमुंद पर कांग्रेस का माहौल मजबूत होने के बावजूद पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
वर्तमान जिला अध्यक्ष रश्मि चंद्राकर की विधानसभा हार के बादभीतरघात की चर्चा ने संगठन को भीतर से हिलाकर रख दिया था। कुछ नेताओं पर “पार्टी विरोधी गतिविधियों” का आरोप लगा,पर कार्रवाई करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई।
निष्कासन और बहाली का राजनीतिक तमाशा हाल ही में बागबाहरा ब्लॉक के पूर्व अध्यक्ष अंकित बागबाहरा को पार्टी विरोधी कार्यों के आरोप में निष्कासित किया गया। लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें फिर बहाल कर दिया गया। अंकित बागबाहरा लंबे समय से बागबाहरा क्षेत्र में जनता के मुद्दों को लेकर संघर्षरत रहे हैं। कई कार्यकर्ता मानते हैं कि पार्टी में सच्चाई बोलना और जनता के पक्ष में खड़ा होना कुछ नेताओं को रास नहीं आता।”
गौरतलब है कि जिला कांग्रेस भवन में आज जो कुछ हुआ, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि महासमुंद कांग्रेस संगठन में जातिगत भेदभाव, गुटबाजी और भीतरघात की दीवारें कितनी ऊँची हो चुकी हैं। पर्यवेक्षक के सामने जिस तरह से एक वरिष्ठ महामंत्री ने अपनी ही जिलाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वह अपने आप में कांग्रेस की संगठनात्मक विफलता की सबसे बड़ी मिसाल है।
जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री ने अपने सवालों से यह स्पष्ट कर दिया है कि कार्य जाति नहीं से क्षमता से चलना चाहिए। दलित और महिला कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे भेदभाव पर सारी कांग्रेस की गुटबाजी मुखर होकर सामने आई है।
समय रहते अगर पार्टी ने अब भी इस गुटबाजी पर अंकुश नहीं लगाया, तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस को अपने ही भीतर बैठे विरोधियों से लड़ना पड़ेगा। “महासमुंद कांग्रेस में भीतरघात, जातिवाद और अहंकार का तांडव अब बदलाव नहीं हुआ तो टूटन तय है।


