महासमुंद। जिले में अवैध रेत खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की सख्त और साहसिक कार्रवाई अब पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन गई है। इस ऐतिहासिक कदम से शासन को 7 करोड़ 41 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। यह न केवल राजस्व वृद्धि का रिकॉर्ड है, बल्कि खनिज माफियाओं पर प्रशासनिक दृढ़ता की मिसाल भी है।
कलेक्टर लंगेह के निर्देश पर खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम पंचायत बरबसपुर, घोड़ारी, बड़गांव और बिरकोनी क्षेत्र में सरकारी व निजी भूमि पर अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त किया था। तत्पश्चात, ड्रोन सर्वे के माध्यम से 2,61,323 घनमीटर रेत का अवैध भंडारण चिन्हांकित किया गया — जो अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
नीलामी प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न किया गया, जिसमें 10 रेत ब्लॉकों की नीलामी से 6.69 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है, जबकि एक ब्लॉक से 56.39 लाख रुपए की राशि अभी प्राप्त होना शेष है। आवेदन शुल्क और जप्त प्रतिभूति राशि जोड़ने पर शासन को कुल 7 करोड़ 41 लाख 5 हजार 706 रुपए का राजस्व लाभ होगा। बरबसपुर-ए, बरबसपुर-बी, बरबसपुर-सी, घोड़ारी-डी, बड़गांव-ई, बड़गांव-एफ, बड़गांव-जी, बिरकोनी-एच, बिरकोनी-आई और बिरकोनी-जे शामिल हैं।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि “खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन या भंडारण में संलिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कर सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। खनिज विभाग ने कलेक्टर के निर्देश पर अब जिलेभर में विशेष अभियान शुरू कर दिया है, ताकि रेत, मुरुम और अन्य खनिजों के अवैध दोहन पर स्थायी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
प्रशासनिक ईमानदारी का उदाहरण बने कलेक्टर लंगेह
महासमुंद में इस स्तर की निर्णायक और निडर कार्रवाई शायद पहली बार हुई है। आमतौर पर नेताओं और मंत्रियों के दबाव में कलेक्टर इस प्रकार की कार्रवाई करने से कतराते हैं। लेकिन विनय कुमार लंगेह ने दबावों की परवाह किए बिना कानून और शासन के हित को सर्वोपरि रखते हुए यह कार्रवाई की — जिससे राज्य सरकार को करोड़ों का राजस्व मिला और अवैध खनन माफियाओं को कड़ा संदेश भी।
अगर प्रदेश के हर जिले में कलेक्टर इसी प्रकार की निडर और पारदर्शी कार्रवाई करने लगें, तो छत्तीसगढ़ की खनन व्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक ईमानदारी का प्रतीक बनी है, बल्कि जनता के बीच शासन के प्रति विश्वास और जवाबदेही की भावना को भी मज़बूत करती है।


