Saturday, 7 Mar 2026

शहर अध्यक्ष की दावेदार प्रीति उपाध्याय शुक्ला की फेसबुक पोस्ट ने मचाई हलचल, राहुल गांधी से उम्मीदें, पुराने मठाधीशों पर तंज — क्या बदल पाएगी राजनीति की धारा?

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों संगठन सृजन अभियान जोरों पर है। शहर और जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं और अफवाहों का दौर गर्म है। इसी बीच रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद की मजबूत दावेदार प्रीति उपाध्याय शुक्ला की एक फेसबुक पोस्ट ने पार्टी के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। उनकी पोस्ट सिर्फ एक व्यक्तिगत भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि कांग्रेस की “आधी आबादी” की अनसुनी पुकार और “नारी न्याय” की मांग का सशक्त प्रतीक बन गई है।

अफवाहों के बीच ‘नारी की पुकार’

प्रीति उपाध्याय शुक्ला ने अपनी पोस्ट में उन मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं पर सवाल उठाया है, जिनमें कहा जा रहा है कि “फलाने का नाम फाइनल हो गया।” उन्होंने राहत के साथ लिखा कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति का अंतिम निर्णय राहुल गांधी द्वारा ही लिया जाएगा। “हम जैसी महिलाएं राहुल गांधी जी की तरफ उम्मीद से देख रही हैं,” उन्होंने लिखा — जो केवल एक भावुक अपील नहीं, बल्कि महिलाओं की उपेक्षा के खिलाफ आवाज है।

आधी आबादी-आधा हक’ की मांग

प्रीति की पोस्ट का केंद्रीय संदेश साफ है — महिलाओं को बराबरी का मौका मिले। उन्होंने सवाल उठाया “क्या वाकई में आधी आबादी यानी हम महिलाओं को उनका हक दिया जाएगा? ”यह सवाल उन सैकड़ों महिला कार्यकर्ताओं की आवाज है, जो वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत कर रही हैं लेकिन निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया से दूर रखी जाती हैं। कांग्रेस भले ही संगठन सृजन अभियान में 50% आरक्षण की बात करती हो, लेकिन प्रीति की पोस्ट यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या यह वादा जमीन पर उतरेगा या सिर्फ स्लोगन बनकर रह जाएगा?

पुराने मठाधीशों पर सीधा हमला

बिना नाम लिए प्रीति उपाध्याय शुक्ला ने पुराने नेताओं पर तीखा वार किया “या कि वही मठाधीश अपने लोगों को सेट कर देंगे?”उनका यह तंज कांग्रेस संगठन के उस पुराने ढांचे पर चोट है, जहां वर्षों से वही चेहरे और वही समीकरण हावी हैं। उन्होंने चेताया —“यदि ऐसा हुआ तो आने वाले चुनाव में परिणाम भी वही होंगे जो होते आए हैं।” यह सीधा संदेश है कि यदि पार्टी परिवर्तन नहीं करेगी, तो जनता भी बदलाव कर देगी।

प्रीति ने राहुल गांधी पर भरोसा जताया लेकिन साथ ही सवाल भी उठाए “क्या राहुल गांधी जी की सोच के अनुसार यह प्रक्रिया पारदर्शिता से पूरी होगी? क्या नए और समर्पित नेतृत्व को अवसर मिलेगा?” उनकी यह उम्मीद कांग्रेस नेतृत्व की परीक्षा बन गई है।

 क्या ‘नारी न्याय’ को मिलेगा राजनीतिक न्याय?

यह पोस्ट अब केवल रायपुर की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस की महिला शक्ति की सामूहिक आवाज बन गई है। कई महिला कार्यकर्ता इसे साझा कर रही हैं और “आधी आबादी को आधा हक” की मुहिम का समर्थन कर रही हैं। रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ अब केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं की भागीदारी बनाम पुराने ढांचे की जंग बन गई है।

सवाल यह है  क्या राहुल गांधी संगठन सृजन अभियान के जरिए सच में नया नेतृत्व लाएंगे या फिर पुरानी सेटिंग्स ही तय करेंगी भविष्य का खेल? महिलाएं अब तालियां बजाने नहीं, निर्णय लेने की भूमिका चाहती हैं। प्रीति उपाध्याय शुक्ला की पोस्ट ने यह संदेश साफ कर दिया है। “नारी न्याय” अब केवल नारा नहीं, राजनीतिक क्रांति का प्रारंभ है। क्या रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर एक महिला की ताजपोशी होगी? या फिर मठाधीशों का खेला फिर से बदलेगा? सारी नजरें अब राहुल गांधी पर टिकी हैं…

 

 

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