Saturday, 7 Mar 2026

कौवाझर में सरकारी पट्टे की भूमि बिक्री पर बवाल, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार

महासमुंद, 10 नवंबर। तहसील सिरपुर क्षेत्र के ग्राम कौवाझर में सरकारी पट्टे की जमीन की संदिग्ध बिक्री को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि शासन से प्राप्त पट्टे की भूमि को बिना किसी वैधानिक अनुमति के बेचने की तैयारी की जा रही थी। ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आवेदन प्रस्तुत कर तत्काल बिक्री रोकने और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने बताया कि दिनांक 30/10/2025 को एक दैनिक समाचार पत्र में भूमि बिक्री का विज्ञापन प्रकाशित किया गया, जिससे पूरे गांव में सनसनी फैल गई। ईश्तहार में जिन खसरा नंबरों का उल्लेख किया गया, उनमें कई ऐसे नंबर शामिल हैं जिनका पूर्व रिकॉर्ड “छोटे झाड़ जंगल” और “घांस मद” में दर्ज था। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि इन खसरों का पट्टा “शासन की मूल प्रक्रिया व मापदंडों को नजरअंदाज करते हुए” कुछ व्यक्तियों के नाम कर दिया है।

शासन भूमि को भूमिस्वामी मद में दर्ज दिखाकर बेचने का प्रयास?

ग्राम कौवाझर, पटवारी हल्का नंबर 07 के अंतर्गत स्थित विवादित भूमि—खसरा नंबर 13/1, 19, 24, 28/1, 46/1, 47/1, 48/1, 26, 27, 36/1, 8, 9, 5, 7—कुल 19.130 हेक्टेयर बताई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन खसरा नंबरों में शामिल—खसरा 5, 7, 8, 9, 13, 46 और 48—का पुराना रिकॉर्ड 1955–56 के अधिकार अभिलेख और 1948–49 की चकबंदी मिशल में घांस व छोटे झाड़ जंगल मद में दर्ज है। इसके बावजूद इन्हें निजी नामों में “भूमिस्वामी मद” में दर्ज कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि “यह पूरा मामला जांच योग्य है, क्योंकि शासकीय भूमि को निजी पट्टा में दर्ज करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं।”

ग्रामीणों के अनुसार भूमि का सौदा पहले ही पक्का हो चुका था और अब बिक्री का रास्ता साफ करने के लिए ईश्तहार प्रकाशित कराया गया। यह सब बिना कलेक्टर अनुमति के किया गया, जो सीधे–सीधे कानून का उल्लंघन है। ग्रामवासियों का समूह कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए निम्न मांगें रखी है। जिसमें विवादित खसरा नंबरों की बिक्री तत्काल रोकी जाए। शासन की भूमि को निजी नाम दर्ज करने की जांच की जाए। दोषियों पर उचित कार्रवाई हो, ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो “गांव की मूल्यवान शासकीय भूमि निजी हाथों में चली जाएगी।”

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