Saturday, 7 Mar 2026

धान खरीदी से पहले संकट गहराया, कृषि अधिकारी भी ड्यूटी से हटे

महासमुंद। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी शुरू होने से पहले जिला प्रशासन के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटरों की चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल से जूझ रही प्रशासनिक व्यवस्था अब कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के विरोध के कारण और अधिक दबाव में आ गई है।  मालूम हो कि कृषि विभाग के ग्रा.कृ.वि.अ. और कृ.वि.अ. को धान उपार्जन केंद्रों में प्रभारी अधिकारी, नोडल अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी, ट्रस्टेड पर्सन और समिति प्रबंधक के रूप में लगाए जाने का विरोध करते हुए कृषि स्नातक अधिकारी संघ ने स्पष्ट किया है कि वे धान खरीदी कार्य में किसी भी प्रकार की ड्यूटी स्वीकार नहीं करेंगे। संघ का कहना है कि यह नियुक्ति अनुचित है और विभागीय कार्यों के साथ न्याय नहीं करती।

संघ ने कृषि उत्पादन आयुक्त, संचालक कृषि और सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। पत्र में कहा गया है कि पूर्व वर्षों में भी शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि कृषि अधिकारियों को धान खरीदी जैसे गैर विभागीय कार्यों में शामिल न किया जाए। इसके बावजूद हर वर्ष ड्यूटी लगाना अधिकारियों को अनावश्यक मुसीबत में डालने जैसा है। संघ ने बताया कि बीते सालों में धान उपार्जन केंद्रों में ड्यूटी के दौरान कई कृषि अधिकारियों को वसूली प्रकरण, न्यायालयीन कार्यवाही और प्रशासनिक दबाव झेलना पड़ा। इन परिस्थितियों ने अधिकारियों और उनके परिवारों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसकी पुनरावृत्ति रोकना आवश्यक है।

कृषि स्नातक अधिकारी संघ ने 08 से 23 सितंबर 2025 तक अपने 9 सूत्रीय आंदोलन में भी धान खरीदी जैसी गैर विभागीय ड्यूटी को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से रखी थी। उनका कहना है कि बार-बार निवेदन के बावजूद शासन स्तर पर इस दिशा में ठोस निर्णय न होने से अधिकारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि 9 और 13 नवंबर 2025 को हुई प्रांतीय बैठकों में संघ ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि कृषि अधिकारी धान उपार्जन से संबंधित सभी ड्यूटी का विरोध करेंगे और केवल विभागीय कार्यों पर ही ध्यान देंगे। संघ का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है, क्योंकि गैर विभागीय कार्य लगातार बढ़ते जा रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि बहिष्कार के कारण किसी अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और जिला प्रशासन की होगी।

गैर विभागीय कार्यों को बताया विभागीय योजनाओं के लिए बाधक

संघ ने यह भी कहा है कि ग्राम पंचायत सचिवीय कार्य, DCS संबंधित कार्य और धान उपार्जन जैसी जिम्मेदारियाँ कृषि विभाग के मूल कार्य से अलग हैं। इन कार्यों में कृषि अधिकारियों को लगाने से विभाग की फ्लैगशिप योजनाएँ और फील्ड गतिविधियाँ गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं।

परिस्थिति बनी गंभीर, प्रशासन बता रहा नियंत्रण में

एक ओर समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर पहले से हड़ताल में हैं, अब कृषि अधिकारी भी धान खरीदी कार्य से हट गए हैं। इससे 15 नवंबर से होने वाली धान खरीदी की व्यवस्था गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। हालाँकि जिला प्रशासन स्थिति को नियंत्रित बताने का दावा कर रहा है।

 

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