विवादित टिप्पणी के बाद दो थानों में जमा हुए समाजजन, 15 नवंबर को कथा स्थल से पुलिस ने की आरोपी आशुतोष चैतन्य की गिरफ्तारी
महासमुंद। तखतपुर में आयोजित एक भागवत कथा कार्यक्रम के दौरान भागवताचार्य आशुतोष चैतन्य द्वारा सतनामी समाज पर की गई अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी के बाद प्रदेशभर के सतनामी समाज में गहरा आक्रोश फैल गया। संबंधित वीडियो सोशल मीडिया में तेज़ी से वायरल हुआ, जिसके बाद समाजजन ने कथाकार पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रकरण दर्ज, पर गिरफ्तारी न होने से बढ़ा विवाद
वायरल वीडियो की जांच के आधार पर तखतपुर थाना पुलिस ने आशुतोष चैतन्य के खिलाफ मामला तो दर्ज किया, लेकिन तत्काल गिरफ्तारी न होने से समाज में नाराज़गी बढ़ती गई। समाजजन का कहना था कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है और कार्रवाई में जानबूझकर देरी हो रही है।
सिटी कोतवाली और तखतपुर थाना—दोनों जगह समाजजन का जुटान
गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज युवा प्रकोष्ठ, महासमुंद के पदाधिकारी बड़ी संख्या में सिटी कोतवाली पहुंचे। जिलाध्यक्ष तेजराम चौलिक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।इधर तखतपुर थाना में भी समाज के लोग एकत्र होते गए। दोनों स्थानों पर शांति बनाए रखते हुए समाजजन ने स्पष्ट कहा—”आरोपी की गिरफ्तारी तक पीछे नहीं हटेंगे।”
15 नवंबर को पुलिस ने किया एक्शन — कथा पंडाल से आरोपी गिरफ्तार, लगातार प्रशासनिक दबाव, दर्ज प्रकरण और समाज की एकजुटता को देखते हुए पुलिस ने 15 नवंबर की शाम कथा पंडाल में ही आशुतोष चैतन्य को गिरफ्तार कर लिया। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर फैली, समाज में संतोष की लहर दौड़ गई।
समाज ने जताया भरोसा—‘कानून ने अपना काम किया’
गिरफ्तारी के बाद समाजजन ने शासन और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा—“न्याय व्यवस्था पर हमारा विश्वास मजबूत हुआ है। आरोपी ने समाज को नीचा दिखाने की नीयत से टिप्पणी की थी, जिस पर अब कानून ने संज्ञान लिया है।” समाज ने कहा कि सतनामी समुदाय सदैव सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता के मार्ग पर चलता आया है। समाज का मूल पेशा कृषि है, और सतनाम संस्कृति में गाय को विशेष सम्मान प्राप्त है।
साथ ही उन्होंने बताया कि समाज के राजमहंत, नैनदास महिलांग, महंत पोषुदास, महंत विशालदास और महंत अंजोरदास ने करमनडीह और ढाबाडीह के बूचड़खानों को बंद कराकर गौ-संरक्षण का ऐतिहासिक कार्य किया, जो आज भी समाज की गौरवगाथा है।बड़ी संख्या में समाजजन की उपस्थिति में गिरफ्तारी की मांग में शामिल प्रमुख शामिल रहे सामाजिक लोगों में जिलाध्यक्ष विजय बंजारे, अधिवक्ता लिंकन कुरील, अधिवक्ता नंदकुमार जोगी, युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष तेजराम चौलिक, जिला सहसचिव भोजनाथ मधुकर, पार्षद राहुल आंवले, हरक मन्नाड़े, कृष्णा नारंग, आत्माराम मारकंडे, चमन कुर्रे, महेश जोशी, देवकुमार जोशी, सोनू टंडन, देवेंद्र टंडन, तोमेश कुर्रे, गंगाराम भगत को सले, शुभम टंडन, भावेश घृतलहरे सहित सैकड़ों समाजजन मौजूद रहे।


