Saturday, 7 Mar 2026

“ये तस्वीर देखकर आपका खून खौल जाएगा, 14 साल की बच्ची ने जो कहा, सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे!”

महासमुंद। अच्छे दिन और सुशासन के बड़े-बड़े दावे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम कोसरंगी में रहने वाले मनोज साहू (45 वर्ष) के लिए ये दावे महज खोखले नारे साबित हो रहे हैं। दो मासूम बच्चों—14 साल की बेटी और 9 साल के बेटे—के साथ मनोज एक जीर्ण-शीर्ण मिट्टी के घर में रहने को मजबूर है, जिसकी दीवारें हर पल भरभरा कर गिरने को तैयार हैं। मानसिक रूप से अस्वस्थ पत्नी भी उन्हें छोड़ चुकी है। गरीबी ने इस परिवार को इस कदर जकड़ रखा है कि दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से जुट पाती है।

मनोज साहू के साथ 14 साल की बेटी ने कहा हम लोग बहुत गरीब हैं अंकल हमारी कोई नहीं सुनता, जिससे मदद मांगने जाओ वही हम लोगों को भगा देता है। अब मर जाएंगे तो मर जाएंगे, पर रहना तो इसी घर पर है ना। आप बोलिए ना सरपंच अंकल को हमारा भी नल लगवा दे, हमारा घर भी बनवा दें…


सबसे दर्दनाक तथ्य यह है कि मनोज साहू का नाम 2017-18 में प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे में शामिल हुआ था, लेकिन तत्कालीन सरपंच और ग्राम सहायक की उदासीनता व कथित साजिश के चलते उन्हें यह आवास आज तक नहीं मिल सका। न आवास मिला, न स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय, और न ही नल-जल योजना का पानी। पूरे कोसरंगी गांव में हर घर में पक्का मकान, नल और शौचालय चमक रहे हैं, लेकिन मनोज का घर आज भी अंधेरे में डूबा है।


जब महासमुंद टाइम्स न्यूज की टीम मनोज के घर पहुंची तो जो नजारा दिखा, उसने कलेजा कंपा दिया। टूटी-फूटी मिट्टी की दीवारों के बीच 14 साल की बेटी घर की सारी जिम्मेदारी निभाती दिखी—चूल्हा जलाना, छोटे भाई की देखभाल करना और पिता का हौसला बनाए रखना। उसकी आंखों में बचपन नहीं, मजबूरी की गहरी लकीरें थीं।
ग्राम सरपंच सुरेश साहू को मौके पर बुलाया गया तो उन्होंने बात को टालते हुए कहा, “2017-18 में मनोज का आवास स्वीकृत हुआ था, लेकिन तत्कालीन सरपंच ने जानबूझकर प्रस्ताव जनपद पंचायत नहीं भेजा।” लेकिन जब मनोज से पूछा गया कि आखिर सरपंच उनसे नाराज क्यों थे, तो उन्होंने जो खुलासा किया, वह पूरे तंत्र की सड़ांध को उजागर करता है।
मनोज ने बताया, “मेरे पूर्वजों की थोड़ी-सी पुश्तैनी जमीन है। उसी पर कुछ लोगों की नजर है। मुझे किसी भी सरकारी योजना का लाभ इसलिए नहीं दिया जाता ताकि मैं हताश होकर गांव छोड़ दूं और अपनी जमीन सस्ते में बेच दूं। पिछले 15 साल से मैं दर-दर भटक रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।”
तीन_तीन सरपंच बदल गए, जनपद सदस्य, विधायक और सांसद भी गांव में आते-जाते रहे, लेकिन मनोज साहू के इस दर्द पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सरकार बार-बार कहती है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, लेकिन कोसरंगी में अंतिम व्यक्ति आज भी मिट्टी के टूटे घर में सांस लेने को मजबूर है।
प्रश्न यह है—क्या जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर एक गरीब की पुकार कलेक्टर, एसडीएम, जनपद सीईओ तक नहीं पहुंच सकती? क्या जमीन हड़पने की साजिश के आगे सारी सरकारी योजनाएं बौनी साबित हो जाएंगी? मनोज साहू और उसके दो मासूम बच्चों की यह करुण पुकार अब प्रशासन के लिए चुनौती बन चुकी है।
क्या अब भी सुशासन के दावे खोखले साबित होंगे या मनोज को उसका हक मिलेगा?

Share This Article

- Advertisement -

error: Content is protected !!

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/ihrkiamy/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/ihrkiamy/public_html/wp-content/plugins/gspeech/includes/gspeech_frontend.php on line 545